कुर्ला में फ्लैट मेंटेनेंस घोटाला, बॉम्बे टैक्सीमेंस कॉलोनी और फेडरेशन पर मिलीभगत के आरोप
Mumbai News: कुर्ला में फ्लैट मेंटेनेंस घोटाले का मामला उजागर हुआ। बॉम्बे टैक्सीमेंस सीएचएस और हाउसिंग फेडरेशन पर मिलीभगत के आरोप लगे है। शूर संभाजी क्रीडा मंडल ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
- Written By: सोनाली चावरे
फ्लैट मेंटेनेंस घोटाला (pic credit; social media)
Maharashtra News: मुंबई के कुर्ला इलाके में फ्लैट मेंटेनेंस से जुड़े बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। इस घोटाले में बॉम्बे टैक्सीमेंस कॉलोनी सीएचएस लिमिटेड और मुंबई डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव हाउसिंग फेडरेशन लिमिटेड पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लगे हैं। इस संबंध में शूर संभाजी क्रीडा मंडल ने सहकारी संस्थाओं के सहायक निबंधक (एल वार्ड), कोकण भवन, सीबीडी बेलापुर को लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, 1960 और संस्था के पंजीकृत उपविधियों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन किया गया है। आरोप है कि विशेष साधारण सभा (एसजीएम) के लिए निवासियों के फर्जी हस्ताक्षरों का उपयोग किया गया। इसके अलावा, कई अन्य अवैध गतिविधियां भी सामने आई हैं। पुलिस और सहायक निबंधक कार्यालय की जांच में इन आरोपों की पुष्टि हो चुकी है।
घोटाले को लेकर सोसाइटी की मैनेजिंग कमेटी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। ऑफिस बेयरर्स के कई सदस्यों की कार्यशैली पर सवाल उठे हैं। डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय में भी इस मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है।
सम्बंधित ख़बरें
मंच साझा करने से किया परहेज, पर सुनेत्रा पवार की जीत के लिए एक हुए फडणवीस और सुप्रिया सुले
अस्पताल के बिस्तर से शरद पवार की भावुक अपील- सुनेत्रा को जिताएं, अजीत को श्रद्धांजलि दें
Ashok Kharat Case: पाखंडी तांत्रिक अशोक खरात का काला साम्राज्य, 15वीं FIR दर्ज, अब तक करोड़ों का गबन
महिला के गुस्से का सामना करते दिखे मंत्री गिरीश महाजन, वायरल वीडियो के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
मंडल के सचिव राजेंद्र नानोसकर ने बताया कि वसूली प्रक्रिया में भी भेदभाव किया गया। कुछ सदस्यों को निशाना बनाया गया, जबकि 11 लाख रुपये से अधिक बकाया वाले सदस्य की अनदेखी कर दी गई। अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि सोसाइटी की मैनेजिंग कमेटी ने जानबूझकर महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम की धारा 73 और 78 का उल्लंघन किया है।
इस पूरे प्रकरण ने न केवल सोसाइटी की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि फेडरेशन और कॉलोनी प्रबंधन की कार्यशैली पर भी गंभीर संदेह जताया गया है। अब सभी की निगाहें इस मामले में होने वाली आगामी जांच पर टिकी हैं।
