राज्य में बाल विवाह रोकने के लिए अपनायी जाएगी राजस्थान मॉडल, मंत्री अदिती तटकरे ने बताया सरकार का प्लान
Child Marriages In Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार बाल विवाह रोकने के लिए राजस्थान मॉडल को अपनायी जाएगी। अगले 5 वर्षों में बाल विवाह दर 10% से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
बाल विवाह ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Curb Child Marriages In Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार राज्य में बाल विवाह की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए राजस्थान सरकार के एक विशेष मॉडल का अध्ययन करने जा रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिती तटकरे ने विधानसभा में बताया कि विवाह पत्रिका में दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि दर्ज करने संबंधी राजस्थान की पहल का अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर महाराष्ट्र में भी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रावधान लागू करने पर विचार किया जाएगा।
पांच साल में 10 प्रतिशत से नीचे लाने का लक्ष्य
अतुल भातखलकर के प्रश्न पर विधानसभा में जवाब देते हुए मंत्री तटकरे ने कहा कि राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में बाल विवाह का प्रतिशत 10 फीसदी से नीचे लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर व्यापक अभियान और सख्त कार्रवाई की जा रही है।
राज्य में घट रहा है बाल विवाह का प्रतिशत
मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2019-21) के अनुसार देश में बाल विवाह का औसत 23.3 प्रतिशत था, जबकि महाराष्ट्र में यह 21.9 प्रतिशत था। वहीं 2023-24 के चयनित जिलों के सर्वेक्षण में देश का औसत घटकर 20.1 प्रतिशत और महाराष्ट्र का आंकड़ा 19.7 प्रतिशत पर आ गया है। यह राज्य में जागरूकता और प्रशासनिक प्रयासों का परिणाम है।
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हजारों बाल विवाह रोके गए
तटकरे ने कहा कि वर्ष 2018-19 में 187, 2019-20 में 240, 2020-21 में 519, 2021-22 में 831 और 2022-23 में 930 बाल विवाह रोके गए। वर्ष 2022-23 में 81 FIR भी दर्ज की गईं। इसके बाद 2023-24 में 1,253 और 2024-25 में 1,495 बाल विवाह रोके गए। चालू वर्ष में अब तक 1,434 बाल विवाह रोककर संबंधित दोषियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं।
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स्थानीय स्तर पर बढ़ाई जा रही निगरानी
मंत्री अदिती तटकरे ने बताया कि जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में जिला कार्यबल, ग्राम संरक्षण कक्ष तथा तालुका और ग्राम पंचायत स्तर की समितियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। बाल विवाह में शामिल परिवारों, संबंधित व्यक्तियों और सहयोग करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
साथ ही प्रवासी मजदूरों के बच्चों के लिए बाल संगोपन केंद्र और बालगृह सुविधाओं का विस्तार भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
