महात्मा फुले योजना में फडणवीस का बड़ा धमाका: अब 2 लाख तक का कर्ज होगा माफ, नियमों में भी दी ढील

Mahatma Phule Karj Mafi Yojana: महाराष्ट्र में किसानों को बड़ी राहत। महात्मा फुले कर्जमाफी योजना में अब 2 लाख तक का लोन माफ, फडणवीस सरकार ने नियमों में ढील देकर 56 लाख नियमित किसानों को दी सौगात।
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देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Mahatma Phule Yojana 2 Lakh Loan Waiver: महाराष्ट्र की राजनीति में चल रही खींचतान के बीच राज्य सरकार ने अन्नदाताओं के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में अंतिम सप्ताह प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए राज्य के किसानों के लिए एक ऐतिहासिक कर्जमाफी की घोषणा की है। इस नई घोषणा के साथ ही सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसानों को कर्ज के बोझ से मुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए पुराने नियमों में भी बड़े बदलाव किए गए हैं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में घोषणा की कि महात्मा फुले कर्जमाफी योजना के तहत जो किसान पहले केवल 50,000 रुपये तक की मदद के पात्र थे, उन्हें अब बढ़ाकर 2 लाख रुपये तक की कर्जमाफी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि महायुति के विधायकों, विशेषकर रणवीर सावरकर के नेतृत्व में की गई मांग को स्वीकार करते हुए यह निर्णय लिया गया है। फडणवीस के अनुसार, केवल 1 लाख की सीमा रखने पर लगभग 2 लाख किसान इस लाभ से वंचित रह जाते, इसलिए व्यापक हित में इसे 2 लाख रुपये करने का फैसला लिया गया।

2026-27 के नियमों में दी गई ढील

कर्जमाफी के साथ-साथ सरकार ने तकनीकी अड़चनों को भी दूर करने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ऐलान किया कि योजना में 2026-27 का जो नियम पहले लागू था, उसे अब हटा दिया जाएगा। इसका मतलब है कि पिछले दो वर्षों में जिन्होंने नियमित रूप से कर्ज भरा है, वे सभी अब इस माफी के लिए पात्र होंगे। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि यह अब तक की सबसे बड़ी कर्जमाफी योजना है, जो किसानों को वित्तीय अनुशासन सिखाने के साथ-साथ राहत भी प्रदान करेगी।

पुरानी योजनाओं की कमियों पर प्रहार

विधानसभा में बोलते हुए फडणवीस ने पिछली सरकारों की कर्जमाफी योजनाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि 2017 में छत्रपति शिवाजी महाराज सम्मान योजना के तहत लगभग 44 लाख किसानों की मदद की गई थी, लेकिन 2019 की महात्मा फुले कर्जमाफी योजना में 2017 के लाभार्थियों को जानबूझकर बाहर रखा गया था। उन्होंने डेटा पेश करते हुए कहा कि रोहित पवार की जानकारी गलत है और उनकी सरकार अब उन कमियों को दूर कर रही है ताकि कोई भी पात्र किसान पीछे न छूटे।

रोहित पवार का भावुक कार्ड और 'शर्तों' पर नाराजगी

दूसरी ओर, विपक्ष की ओर से रोहित पवार ने इस कर्जमाफी योजना में लगाई गई शर्तों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सदन में भावुक होते हुए कहा कि आज राज्य के किसानों को जो मुश्किलें आ रही हैं और कर्जमाफी में जो शर्तें थोपी गई हैं, वे वैसी नहीं होतीं अगर अजित पवार आज हमारे बीच होते। रोहित पवार ने विश्वास जताया कि दादा के रहते किसानों को बिना किसी अड़चन के न्याय मिलता, जबकि वर्तमान सरकार ने कई जटिल शर्तें लगा दी हैं जिससे किसान परेशान हैं। उन्होंने संकल्प लिया कि वे विपक्ष में रहते हुए भी किसानों के हक की लड़ाई अंतिम समय तक लड़ते रहेंगे।

इस प्रकार, महाराष्ट्र की राजनीति में कर्जमाफी का मुद्दा अब एक नए मोड़ पर है, जहाँ सरकार इसे ऐतिहासिक बता रही है, वहीं विपक्ष इसे शर्तों के जाल में उलझी हुई योजना करार दे रहा है।

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