शिंदे को झटका: ऑपरेशन तुतारी में BJP की सेंध, सुनेत्रा पवार की वजह से ऑपरेशन टाइगर में नया ट्विस्ट

Eknath Shinde Operation Tiger: बीजेपी ने एकनाथ शिंदे के ऑपरेशन तुतारी पर रोक लगाई। शरद पवार के सांसदों को सुनेत्रा पवार की पार्टी में भेजने की सलाह। शिंदे की 19 सांसदों की रणनीति को झटका।
Eknath Shinde Operation Tiger
Eknath Shinde Operation Tiger (डिजाइन फोटो)
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Operation Tutari Maharashtra Stoped By BJP: महाराष्ट्र की राजनीति में 'जोड़-तोड़' का एक नया और दिलचस्प अध्याय शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अपनी पार्टी का विस्तार करने की महत्वाकांक्षी योजना 'ऑपरेशन टाइगर' को बीजेपी आलाकमान ने फिलहाल 'लाल झंडी' दिखा दी है। जानकारी के अनुसार, बीजेपी ने शिंदे के ऑपरेशन टाइगर (ठाकरे गुट के सांसदों को तोड़ने की योजना) के तहत चलाए जा रहे 'ऑपरेशन तुतारी' (शरद पवार गुट के सांसदों को तोड़ने की योजना) में एक बड़ा ट्विस्ट ला दिया है, जिससे शिंदे गुट की 'बारगेनिंग पावर' बढ़ाने की रणनीति को बड़ा झटका लगा है।

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की पार्टी और बीजेपी की दूरगामी रणनीति बताई जा रही है।

बीजेपी का वीटो: शरद पवार के सांसदों के लिए 'सुनेत्रा' का रास्ता

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, बीजेपी आलाकमान ने एकनाथ शिंदे को स्पष्ट सलाह दी है कि यदि शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) के सांसद एनडीए में शामिल होना चाहते हैं, तो उन्हें सीधे शिंदे की शिवसेना में शामिल करने के बजाय उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली पार्टी (NCP) के जरिए आना चाहिए। बीजेपी नहीं चाहती कि शरद पवार के वफादार सीधे शिंदे गुट में जाकर उनकी ताकत को 19 सांसदों तक पहुँचा दें। बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने अपनी पिछली दिल्ली यात्रा के दौरान शिंदे से मुलाकात न करके इस असहमति का संकेत पहले ही दे दिया था।

क्या है शिंदे का '6+6' का गणित?

एकनाथ शिंदे की रणनीति बहुत स्पष्ट थी, उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसद और शरद पवार गुट के 6 सांसदों को अपनी पार्टी में शामिल करना। फिलहाल शिंदे के पास 7 सांसद हैं, और इन 12 नए चेहरों के आने से उनकी संख्या 19 हो जाती। जिससे 2029 के लोकसभा चुनाव में शिंदे कम से कम 19 सीटों पर दावेदारी ठोक सकते थे। शिंदे का मकसद दिल्ली और महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी 'बारगेनिंग पावर' (सौदेबाजी की शक्ति) को बीजेपी के बराबर या करीब लाना है। लेकिन बीजेपी की 'लाल झंडी' ने इस पूरे समीकरण को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

क्यों डगमगा रहा है ठाकरे-पवार के सांसदों का भरोसा?

महायुति सरकार के अगले 5 वर्षों तक मजबूत बने रहने के संकेतों ने विपक्षी सांसदों (ठाकरे और शरद पवार गुट के सांसदों) के बीच भविष्य को लेकर चिंता पैदा कर दी है। सांसदों के पाला बदलने की मुख्य वजहें निम्नलिखित मानी जा रही हैं:

विकास निधि की समस्या: केंद्र और राज्य में सत्ता न होने के कारण विपक्षी सांसदों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लिए फंड जुटाने में भारी कठिनाई हो रही है।

सत्ता का लाभ: केंद्र में बीजेपी के समर्थन से विकास कार्यों में तेजी लाना आसान होता है।

सिंबल का मुद्दा: एकनाथ शिंदे ने चुनाव जीतकर यह साबित कर दिया है कि जनता ने उनके नेतृत्व और चुनाव चिन्ह को स्वीकार कर लिया है, जिससे पुराने पार्टी सिंबल का डर अब खत्म हो गया है।

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