Thane Environment Friendly Development News: राज्य के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कल्याण डोंबिवली मनपा के नगरसेवकों को सीख देते हुए कहा है कि जन प्रतिनिधि शहर का मालिक नहीं, बल्कि लोगों का सेवक होता है। पद का घमंड किए बिना एक कार्यकर्ता की तरह लोगों के बीच रहने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि दौलत से अधिक आदमी की कमाई करो, लोगों की सेवा करो, नागरिकों के फोन का प्रत्युत्तर दो, उनकी समस्याओं को अपनी समस्या समझकर समाधान करो और विकास के हर फैसले में पर्यावरण का ध्यान रखो। उप मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि यह कभी मत भूलना कि लोगों द्वारा चुने जाने के बाद हम उनकी सेवा में शामिल हुए हैं।
कल्याण-डोंबिवली मनपा की स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे वरिष्ठ नगरसेवक रमेश म्हात्रे द्वारा डॉक्टरों की पिटाई किए जाने से शिवसेना की छवि पर बट्टा लगा है। साथ ही उल्हासनगर के नगरसेवकों के अभ्यास दौरे की वजह से भी काफी टीका टिप्पणी हुई है।
जिसको लेकर पूर्व सांसद आनंद परांजपे की पहल पर कल्याण-डोंबिवली के नगरसेवकों के लिए रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर पूर्व सांसद आनंद परांजपे के साथ ही शिवसेना के महाराष्ट्र संगठन प्रमुख विधायक डॉ. बालाजी किणीकर, विधायक राजेश मोरे, शिवसेना जिला प्रमुख गोपाल लांडगे, महापौर हर्षाली चौधरी, केडीएमसी आयुक्त अभिनव गोयल, रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिन के कार्यकारी निदेशक अभिराम घड्याल पाटिल, अरविंद मोरे, गुट नेता विश्वनाथ राणे, रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी के सूरज आव्हाड, डॉ। प्रकाश आवाडे सहित पदाधिकारी व नगरसेवक उपस्थित थे।
उप मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि जन प्रतिनिधि और प्रशासन को बिना किसी झगड़े के समन्वय से काम करना चाहिए। यदि यह शहर हमारा है की भावना से फैसले लिए जाएं, तो विकास तेजी से होता है। उन्होंने कहा कि अधिकारी दुश्मन नहीं हैं, उन्हें विश्वास में लेना चाहिए, नियम समझने चाहिए और पॉजिटिव बातचीत से काम करना चाहिए। शिंदे ने कहा कि वे विधान सभा में सबसे पीछे बैठते थे। हर डिस्कशन को ध्यान से सुनकर, स्टडी करके और एक्सपीरियंस से सीखकर उन्होंने नगरसेवक से मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया।
वृक्षारोपण का उल्लेख करते हुए शिंदे ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और अनियमित वर्षा के कारण अब पर्यावरण दुनिया के सामने सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। इसलिए मनपा को सड़क, सीवर और पानी की आपूर्ति तक सीमित रहने की बजाय पर्यावरण के अनुकूल विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकास के कामों में पेड़ों की कटाई से बचना चाहिए और जरूरत पड़ने पर ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए। हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे को याद करते हुए शिंदे ने कहा कि अगर वे ठाणे में कोई पेड़ कटने या पानी की लाइन फटने जैसी छोटी सी खबर भी पढ़ते थे, तो सुबह फोन करके पूछ लेते थे।
ठाणे में सड़क चौड़ी करने के दौरान हटाए गए पेड़ों को फिर से लगाया गया और आज वे बड़े हो गए हैं और शहर को छाया दे रहे हैं। उन्होंने समझाया कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना ही सच्ची लीडरशिप है।