महाराष्ट्र में E Bus सेवा को रफ्तार चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए केंद्र ने दिए 19 करोड़

Maharashtra E Bus Charging: महाराष्ट्र में ई-बस सेवाओं के चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए केंद्र सरकार ने 19.06 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसमें सर्वाधिक 4.92 करोड़ रुपये भिवंडी मनपा को मिले हैं।
E-bus service gains momentum in Maharashtra: Centre grants ₹19 crore for charging infrastructure
महाराष्ट्र ई-बस चार्जिंग सोर्स- सोशल मीडिया
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Maharashtra E Bus Charging Infrastructure: महाराष्ट्र में ई-बस सेवा को रफ्तार देने के लिए अब चार्जिंग ढांचा मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र की पीएम-ई बस सेवा योजना के तहत राज्य की 11 मनपाओं को ई-बसों के संचालन के लिए जरूरी 'मीटर के पीछे' ऊर्जा संबंधी बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए कुल 19;06 करोड़ रुपए की शत प्रतिशत केंद्रीय निधि मंजूर की गई है।

इस निधि में भिवंडी को सबसे ज्यादा 4.92 करोड़ रुपए मिले हैं। इस फंड से न केवल चार्जिंग ढांचे को मजबूती मिलेगी, बल्कि पर्याप्त बिजली दौड़ेगी और ई-बसें आसानी से चलेंगी। राज्य सरकार द्वारा जारी जीआर के मुताबिक 11 मनपाओं के लिए मंजूर 19.06 करोड़ रुपए में भिवंडी को 4.92 करोड़ रुपए का सबसे बड़ा हिस्सा मिला है, इसके बाद सोलापुर को 3.90 करोड़, नाशिक को 2.07 करोड़ और इचलकरंजी को 2.05 करोड़ रुपए दिए गए हैं। छत्रपति संभाजीनगर को 1.16 करोड़, अहिल्यानगर को 1.11 करोड़, मीरा-भाईंदर को 1.07 करोड़ और वसई-विरार को 1.04 करोड़ रुपए मिलेंगे।

वहीं अकोला को 76 लाख, धुले को 48 लाख और जलगांव को 20 लाख रुपए का आवंटन किया गया है। इसमें भिवंडी को सबसे बड़ा और जलगांव को सबसे कम हिस्सा मिला है। पीएम ई बस सेवा योजना के तहत केवल ई-बसें उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बसों के नियमित और सुचारू संचालन के लिए उनके डिपो व चार्जिंग व्यवस्था तक पर्याप्त बिजली पहुंचाने वाला बुनियादी ढांचा भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से 'मीटर के पीछे' ऊर्जा संबंधी बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए यह राशि मंजूर की गई है।

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भिवंडी और मीरा-भाईंदर के डिपो पर भी किया गया है फोकस

भिवंडी-निजामपुर और मीरा-भाईंदर मनपा के डिपो विकास व उन्नयन कार्यों का भी उल्लेख किया गया है। केंद्रीय संचालन समिति की आठवीं बैठक में मंजूर निधि के अनुपात और संबंधित कार्यों की प्रगति के आधार पर इन दोनों मनपाओं में निधि का - डिपोवार वितरण किया जाएगा। मंजूर निधि का उपयोग केवल 'मीटर के पीछे' ऊर्जा बुनियादी ढांचे के लिए होगा।

अन्य कामों पर खर्च करने पर इसे वित्तीय अनियमितता माना जाएगा और संबंधित मनपा आयुक्त जिम्मेदार होंगे खर्च के बाद उपयोगिता प्रमाणपत्र के साथ निर्धारित्त प्रारूप में कार्य, उद्देश्यों और उपलब्धियों का पूरा विवरण देना अनिवार्य होगा।

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