

Dhirendra Shastri Ganpati Festival: गणपति उत्सव के बीच बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराष्ट्र पहुंचे। कांदिवली और भिवंडी में गणपति दर्शन के दौरान उन्होंने देश की शांति, समृद्धि और सनातन एकता के लिए प्रार्थना की।
इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएं देते हुए शास्त्री ने उनके सार्वजनिक जीवन और देश के विकास से जुड़े अपने विचार भी साझा किए।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 17 सितंबर को महाराष्ट्र में गणपति उत्सव के दौरान कांदिवली और भिवंडी का दौरा किया। उन्होंने भगवान गणपति के दर्शन किए और देश की शांति, समृद्धि तथा सनातन एकता के लिए प्रार्थना की। शास्त्री ने कहा कि इस समय पूरा महाराष्ट्र भगवान गजानन की भक्ति में डूबा हुआ है।
भिवंडी में गणपति दर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि वहां पिछले 38 वर्षों से भगवान गणपति विराजमान हैं और उन्हें दर्शन एवं आशीर्वाद लेने का अवसर मिला। उन्होंने पूरी दुनिया की भलाई, भारत में सनातन एकता, विश्व शांति और देश की तरक्की के लिए प्रार्थना करने की बात कही।
शास्त्री ने यह भी बताया कि भिवंडी में बागेश्वर धाम का एक आश्रम है और वह हर दो-तीन महीने में वहां आते रहते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर धीरेंद्र शास्त्री ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को जन्मदिन पर बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं। शास्त्री ने मोदी के सार्वजनिक जीवन को भारत की प्रगति और विकास से जोड़ते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था और वित्तीय व्यवस्था मजबूत हुई है।
उन्होंने भगवान बागेश्वर बालाजी से प्रधानमंत्री की लंबी और स्वस्थ आयु के लिए प्रार्थना करने की बात भी कही।
नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों के प्रवेश को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने रोक की अपील की है। VHP ने आयोजकों से प्रतिभागियों की पहचान सत्यापित करने जैसी गाइडलाइन भी सुझाई है।
इसी मुद्दे पर सवाल पूछे जाने पर शास्त्री ने कहा कि हर समुदाय को अपने-अपने त्योहार मनाने चाहिए। उन्होंने नवरात्रि को सनातन परंपरा का त्योहार बताते हुए हिंदू धार्मिक परंपराओं और मूर्ति पूजा के संदर्भ में अपने विचार रखे।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उन्होंने अपने गुरुओं से मिले ज्ञान और परंपराओं के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है। उनके अनुसार, उनका उद्देश्य लोगों को केवल शिष्य बनाना नहीं, बल्कि उन्हें गुरु बनने के लिए प्रेरित करना है।
उन्होंने कहा कि जब भारत के लोग गुरु बनेंगे, तभी भारत विश्वगुरु बनेगा।