

फडणवीस, उद्धव और राज ठाकरे एक पुस्तक विमोचन समारोह में साथ नजर आए।
तीनों नेताओं की बंद कमरे में हुई मुलाकात से राजनीतिक अटकलें तेज हुईं।
कार्यक्रम में मराठी कार्टून कला को बढ़ावा देने और समिति बनाने की बात कही गई।
Devendra Fadnavis Uddhav Raj Thackeray Meeting: महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच जारी खींचतान के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे का एक मंच पर आना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।
गुरुवार को दादर स्थित स्वातंत्र्यवीर सावरकर सभागृह में मराठी कार्टून कला पर आधारित पुस्तक 'महाराष्ट्राच्या हास्यरेषा' के विमोचन समारोह में तीनों नेता साथ नजर आए। हालांकि, समारोह से पहले तीनों के बीच बंद कमरे में हुई बातचीत ने इस मुलाकात के राजनीतिक मायनों को लेकर अटकलों को और हवा दे दी।
महाराष्ट्र की मौजूदा सियासत में इस मुलाकात को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। वहीं, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की राजनीतिक भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे। हालांकि, बंद कमरे में हुई बातचीत का एजेंडा सार्वजनिक नहीं हुआ।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने चुटीले अंदाज में उद्धव ठाकरे पर तंज कसते हुए कहा कि उद्धव ने जब भी फोन किया। वह उनसे मिलने गए, लेकिन उसके बाद उन्हें दोबारा बुलाया ही नहीं गया। उनके इस बयान ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में व्यंग्यचित्र कला की समृद्ध परंपरा रही है। इस परंपरा को आगे बढ़ाने और व्यंग्यचित्रकारों को प्रोत्साहित करने के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी। फडणवीस ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में समाजहित के मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सभी को एक साथ आने की परंपरा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र में व्यंग्यचित्र कला को हमेशा सम्मान मिला है। इस कला को और अधिक प्रोत्साहन देने की जरूरत है। व्यंग्यचित्र समाज और राजनीति की विसंगतियों को सामने लाने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने इस कला की विरासत को संरक्षित करने और नई पीढी तक पहुंचाने के महत्व पर जोर दिया।
इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने 'महाराष्ट्राच्या हास्यरेषा' में मराठी के प्रसिद्ध व्यंग्यचित्रकारों के कार्यों के संकलन को सराहनीय बताया। ग्रंथाली पब्लिकेशन्स से प्रकाशित इस पुस्तक का संपादन कार्टूनिस्ट प्रशांत कुलकर्णी ने किया है। पुस्तक में मराठी कार्टून कला के इतिहास, उसके बदलते स्वरूप और वसंत सरवटे जैसे प्रतिष्ठित कार्टूनिस्टों के योगदान को रेखांकित किया गया है।
मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने पुस्तक के संकलन को कठिन काम बताते हुए कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उनका जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ, जहां व्यंग्यचित्र कला का विशेष स्थान रहा। उनके पिता और चाचा बाल ठाकरे दोनों 'मार्मिक' में व्यंग्यचित्र बनाते थे। उनके मार्गदर्शन में ही वह भी व्यंग्यचित्रकार बने। राज ठाकरे ने कहा कि कभी-कभी समाजहित में राजनीति से परे होकर एक साथ आना महाराष्ट्र राज्य की संस्कृति का हिस्सा है। उन्होंने देश में चित्रकारों और व्यंग्यचित्रकारों को अपेक्षित सम्मान नहीं मिलने पर भी चिंता जताई।