

केवल पंजीकृत गोविंदाओं को ही मिलेगा योजना का लाभ
सरकार ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि इस योजना का लाभ केवल उन्हीं गोविंदाओं को मिलेगा, जो 'महाराष्ट्र राज्य दही हांडी गोविंदा एसोसिएशन' के माध्यम से अधिकृत रूप से पंजीकृत होंगे।
इसके साथ ही, गोविंदाओं को निर्धारित आयु सीमा को पूरा करना और मानव पिरामिड बनाने में प्रत्यक्ष रूप से सहभागी होना अनिवार्य है। आयोजकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे सुरक्षा मानकों, न्यायालय के आदेशों और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।Dahi Handi InsuranceMaharashtra: आगामी दही हांडी उत्सव 2026 को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के लाखों गोविंदाओं के हित में एक बड़ा और कल्याणकारी फैसला लिया है। राज्य सरकार ने इस वर्ष मानव पिरामिड बनाने में शामिल होने वाले 1 लाख 60 हजार गोविंदाओं को मुफ्त बीमा सुरक्षा प्रदान करने की मंजूरी दी है।
गुरुवार (6 अगस्त 2026) को जारी सरकारी आदेश के अनुसार, पिछले वर्ष 1.50 लाख गोविंदाओं की तुलना में इस बार बढ़ती भागीदारी को देखते हुए लाभार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है।
सरकार द्वारा घोषित इस बीमा योजना के तहत दही हांडी में सलामी देने के दौरान किसी अनहोनी या दुर्घटना का शिकार होने वाले गोविंदाओं को अधिकतम 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
बीमा शर्तों के अनुसार
मृत्यु होने पर: परिजन को 10 लाख का मुआवजा।
स्थायी पूर्ण दिव्यांगता या दोनों अंग (हाथ/पैर/आंखें) खोने पर:10 लाख।
एक अंग (हाथ/पैर/आंख) खोने पर: 5 लाख।
घायल होने पर इलाज का खर्च: अस्पताल में भर्ती होने पर अधिकतम 1 लाख तक का चिकित्सकीय खर्च कवर किया जाएगा।
राज्य सरकार ने खेल एवं युवक सेवा आयुक्त को निर्देशित किया है कि प्रति गोविंदा 75 या उससे कम प्रीमियम दर पर सेवाएं देने वाली सरकारी बीमा कंपनी का चयन किया जाए।
इस योजना पर आने वाले संपूर्ण वित्तीय भार का वहन राज्य सरकार अपने 'राज्य क्रीड़ा विकास निधि' से करेगी, जिससे गोविंदाओं या पथकों को किसी भी प्रकार का प्रीमियम नहीं देना होगा।
सरकार ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि इस योजना का लाभ केवल उन्हीं गोविंदाओं को मिलेगा, जो 'महाराष्ट्र राज्य दही हांडी गोविंदा एसोसिएशन' के माध्यम से अधिकृत रूप से पंजीकृत होंगे।
इसके साथ ही, गोविंदाओं को निर्धारित आयु सीमा को पूरा करना और मानव पिरामिड बनाने में प्रत्यक्ष रूप से सहभागी होना अनिवार्य है। आयोजकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे सुरक्षा मानकों, न्यायालय के आदेशों और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।