मुंबई में साइबर अपराध का बढ़ा ग्राफ: 2026 के 7 महीनों में 3,689 मामले दर्ज, 847 केस सुलझाने में मिली सफलता

Mumbai Cyber Crime: मुंबई में 2026 के शुरुआती 7 महीनों में ही साइबर अपराध के 3,689 मामले दर्ज हुए। AI और वॉयस क्लोनिंग तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से पुलिस के लिए मामलों को सुलझाना बड़ी चुनौती बना।
Rising trend of cybercrime in Mumbai: 3,689 cases registered in the first seven months of 2026
मुंबई साइबर अपराध, प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स- सोशल मीडिया
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Mumbai AI Frauds Digital Arrest Cases: आर्थिक राजधानी मुंबई में साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। 2026 के शुरुआती सात महीनों में ही शहर में ऑनलाइन धोखाधड़ी के 3,689 मामले दर्ज किए गए हैं।

यह आंकड़ा 2025 में दर्ज कुल 4,825 मामलों का करीब 75 प्रतिशत है। वहीं, दर्ज मामलों की तुलना में पुलिस की जांच और गिरफ्तारी के आंकड़े काफी कम हैं।

3,689 मामलों में 847 ही सुलझे

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस साल दर्ज 3,689 ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में से पुलिस अब तक 847 मामलों को सुलझा पाई है। इन मामलों में कुल 637 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है।

साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक घटनाओं की संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि शर्मिंदगी, सामाजिक दबाव और जागरूकता की कमी के कारण कई पीड़ित पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराते।

डिजिटल और क्रेडिट कार्ड फ्रॉड सबसे ज्यादा

साइबर अपराध के विभिन्न प्रकारों में डिजिटल और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी धोखाधड़ी सबसे आगे रही। इस श्रेणी में 914 मामले दर्ज किए गए। इनमें से केवल 142 मामलों को सुलझाया जा सका और 81 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।

इसके अलावा शेयर बाजार में निवेश के नाम पर ठगी के 275 मामले, हैकिंग के 187 मामले और क्रिप्टो व अन्य निवेश धोखाधड़ी के 145 मामले सामने आए हैं।

फर्जी प्रोफाइल और नौकरी के नाम पर भी ठगी

आंकड़ों के अनुसार, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल और ईमेल मॉर्फिंग से जुड़े 136 मामले दर्ज हुए। फिशिंग और स्पूफिंग के 103, फर्जी वेबसाइटों के 72 और नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के 70 मामले सामने आए हैं। सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को ठगने के भी 84 मामले दर्ज किए गए हैं।

बड़े साइबर फ्रॉड ने बढ़ाई चिंता

मुंबई शहर में हाल के महीनों में साइबर ठगी के कई बड़े मामले सामने आए हैं। इनमें 2.55 करोड़ रुपये का डिजिटल अरेस्ट मामला, 74.26 लाख रुपये का शेयर निवेश फ्रॉड और करीब 350 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन से जुड़े साइबर रैकेट की जांच शामिल है।

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AI से ठगी का तरीका हुआ ज्यादा जटिल

साइबर विशेषज्ञों और आईटी क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल ने साइबर ठगों के तौर-तरीकों को और जटिल बना दिया है।

वॉयस क्लोनिंग और इमेज क्लोनिंग के जरिए ठग पीड़ितों को भरोसा दिलाने के लिए अधिक विश्वसनीय फर्जी पहचान तैयार कर सकते हैं।

इसके अलावा गुमनाम बैंक खातों, फर्जी सिम कार्ड और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले नेटवर्क के कारण जांच एजेंसियों के लिए आरोपियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

ऐसे में साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता बढ़ाने के साथ समय पर शिकायत दर्ज करना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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