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छठी की किताब में महाराष्ट्र के लोक नृत्यों की अनदेखी, बालभारती के नए सिलेबस पर क्यों भड़के विद्वान?

Balbharati Textbook Controversy: बालभारती की कक्षा 6 की मराठी पाठ्यपुस्तक में महाराष्ट्र के केवल एक लोक नृत्य को जगह देने और अन्य राज्यों के नृत्यों को शामिल करने पर नया विवाद खड़ा हो गया है।

  • Written By: आकाश मसने
Updated On: Jul 02, 2026 | 05:15 PM

बालभारती की कक्षा छठी की किताब पर विवाद (सोर्स: AI)

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Balbharati Marathi Book Folk Dance Controversy: महाराष्ट्र में इस साल से स्कूली शिक्षा में CBSE प्रणाली को लागू किया गया है, जिसके तहत मराठी को एक अनिवार्य विषय बनाया गया है। सरकार के इस फैसले की सराहना तो हुई, लेकिन अब शिक्षा विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। बालभारती द्वारा कक्षा 6 के लिए तैयार की गई मराठी की पाठ्यपुस्तक में शामिल लोक नृत्य के एक पाठ को लेकर राज्य के शिक्षाविदों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों में भारी आक्रोश है।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद की मुख्य वजह इस पाठ में महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की अनदेखी करना है। पुस्तक के इस अध्याय में कुल पांच लोक नृत्यों का वर्णन किया गया है। हैरानी की बात यह है कि इन पांच नृत्यों में से केवल एक लोक नृत्य महाराष्ट्र का है, जबकि शेष चार नृत्य अन्य राज्यों के शामिल किए गए हैं।

इन राज्यों के लोक नृत्यों को किया गया शामिल

किताब में महाराष्ट्र के सिर्फ ‘वारकरी दिंडी‘ नृत्य को जगह मिली है। वहीं, अन्य राज्यों के नृत्यों की बात करें तो इसमें गुजरात का रास नृत्य, पंजाब का भांगड़ा, बिहार का आदिवासी नृत्य और छत्तीसगढ़ का बस्तर नृत्य शामिल किया गया है।

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विशेषज्ञों और लेखकों ने जताई कड़ी आपत्ति

मशहूर लेखक श्रीपाद भालचंद्र जोशी सहित शिक्षा क्षेत्र के कई विद्वानों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों ने महाराष्ट्र की समृद्ध लोक परंपराओं शामिल नहीं किए जाने पर असंतोष व्यक्त किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब छात्र प्राथमिक स्तर में पढ़ रहे हों, तो उन्हें सबसे पहले अपने राज्य की समृद्ध संस्कृति और इतिहास से परिचित कराया जाना बेहद जरूरी है।

यह भी पढ़ें:- VB-G RAM G: महाराष्ट्र में युवाओं-महिलाओं को मिलेगा बंपर रोजगार, सरकार पूरे राज्य में आयोजित करेगी कार्यशालाएं

महाराष्ट्र के पास लावणी, लेजिम, धनगरी गजा, गोंडल, कोली नृत्य और पोवाड़ा जैसी अत्यंत समृद्ध और ऊर्जावान लोक नृत्य परंपराएं हैं। विशेषज्ञों का तर्क है कि इन सभी विधाओं को पाठ के अलग-अलग अनुभागों में आसानी से शामिल किया जा सकता था, लेकिन बालभारती ने इसकी अनदेखी की है। इसलिए, अब इस पाठ का विरोध हो रहा है और देखना यह होगा कि सरकार इस पर कोई कार्रवाई करती है या नहीं।

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Published On: Jul 02, 2026 | 05:15 PM

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