मुंबई: सिप्ला पर FDA का बड़ा वार! रिएक्टिन प्लस की पैकेजिंग से गोदाम तक मिली गड़बड़ी

Cipla Reactin Plus Case: एफडीए ने 'रिएक्टिन प्लस' की पैकेजिंग पर बिना अनुमति विज्ञापन और गोदाम में स्टॉक संबंधी गड़बड़ियों के बाद सिप्ला का पुणे स्थित C&F दवा बिक्री लाइसेंस रद्द किया।
Cipla Reactin Plus Case
सिप्ला रिएक्टिन प्लस केस(फोटो नवभारत)
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Maharashtra FDA Cancels Pune Drug Sales: प्रिस्क्रिप्शन दवा 'रिएक्टिन प्लस' की पैकेजिंग पर बिना अनुमति विज्ञापन संबंधी सामग्री छापने के साथ-साथ भंडारण और वितरण व्यवस्था में खामियां रखना सिप्ला कंपनी को भारी पड़ गया है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के पुणे के वडकी स्थित दवा बिक्री (सीएंडएफ) लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। जून 2026 में एफडीए ने वडकी स्थित सिप्ला के मुख्य गोदाम का अचानक निरीक्षण किया था।

इस दौरान 'शेड्यूल एच' श्रेणी की प्रिस्क्रिप्शन दवा की पैकेजिंग पर 'एनाल्जेसिक और एंटीपायरेटिक' जैसे बिना अनुमति वाले शब्द विज्ञापन के रूप में छपे पाए गए। औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940 के तहत यह पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है।

स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने आपत्ति जताई कि इस तरह के विज्ञापन से लोगों में डॉक्टर की सलाह के बिना खुद दवा लेने यानी 'सेल्फ-मेडिकेशन' की प्रवृत्ति बढ़ सकती है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। इसी कारण एफडीए ने इस दवा के स्टॉक को तत्काल बाजार से वापस मंगाने के आदेश दिए थे।

हालांकि, जांच में पाया गया कि कंपनी ने प्रशासन के इन आदेशों और निर्देशों का अपेक्षित रूप से पालन नहीं किया। जांच के दौरान कई अन्य अनियमितताएं भी सामने आईं। खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, कंप्यूटरीकृत डेटा और गोदाम में मौजूद वास्तविक स्टॉक के बीच बड़ी विसंगति पाई गई।

इसके अलावा, दवाओं का स्टॉक सीधे जमीन पर रखा गया था और भंडारण के लिए जरूरी पैलेट और रैक की व्यवस्था भी बेहद अपर्याप्त थी। एक्सपायर्ड दवाओं के प्रबंधन की प्रक्रिया में भी अनियमितताएं मिली, जिसके बाद कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

नियमों का जान-बूझकर उल्लंघन

कंपनी द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं पाए जाने और नियमों का जानबूझकर उल्लंघन किए जाने की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने कानूनी प्रावधानों के तहत दवा बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिया।

एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों के स्वास्थ्य और दवाओं की सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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