मुंबई: 96 साल की हुई 'दक्खन की रानी'; पहली लग्जरी ट्रेन 'डेक्कन क्वीन' का आज CSMT पर मनेगा महोत्सव

Mumbai Train News: भारत की पहली सुपरफास्ट और इलेक्ट्रिक ट्रेन 'डेक्कन क्वीन' के 96 वर्ष पूरे होने पर मध्य रेल आज CSMT पर 'ट्रेन महोत्सव' मना रहा है। शाम 5:10 बजे फूलों से सजी ट्रेन रवाना होगी।
Central Railway celebrates 'Train Mahotsav' for the 96th anniversary of India's first deluxe train, Deccan Queen. The historic Mumbai-Pune train will be decorated for today's event.
Mumbai Railway (सो. सोशल मीडिया)
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Mumbai Central Railway News: पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रेल ने अभूतपूर्व प्रगति की है। भारतीय रेलवे विश्व का 4 था सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है, जिसके जरिए रोजाना करोड़ों यात्री देश के एक कोने से दूसरे कोने में सफर करते हैं। इस विशाल रेलवे नेटवर्क में शताब्दी, राजधानी से लेकर आज वंदे भारत जैसी हाई स्पीड और लग्जरी सुपरफास्ट ट्रेनें चल रही हैं। आगे बुलेट और हाईड्रोजन ट्रेन चलाने की दिशा में काम हो रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश की पहली सुपरफास्ट एवं लग्जरी ट्रेन कौन सी थी।

96 साल पहले चली पहली डिलक्स ट्रेन

आज से करीब 96 साल पहले 1930 में भारत में एक ऐसी ट्रेन चलाई गई जिसे देश की पहली सुपरफास्ट ट्रेन का दर्जा हासिल है। सुपरफास्ट ट्रेन का नाम डेक्कन क्वीन है, जिसे 'दक्खन की रानी' भी कहा जाता है। यह ट्रेन आज भी देश आर्थिक राजधानी मुम्बई से राज्य की सांस्कृतिक राजधानी पुणे के बीच चलती है। देश की इस पहली डिलक्स ट्रेन की शुरुआत 1 जून 1930 को हुई थी।

घुडदौड़ देखने अंग्रेज अफसरों के लिए हुई थी शुरू

बताया जाता है कि यह पहली प्रीमियम ट्रेन उन अंग्रेज अफसरों के लिए शुरू की गई जो मुंबई से पुणे घुडदौड़ देखने जाते थे। 1930 में जब इसकी शुरुआत हुई थी, तब यह सप्ताह में सिर्फ एक दिन ही चलती थी। इसमें सात-सात कोचों के दो रेक लगाए गए थे। पहली बार इसे बॉम्बे प्रेसीडेंसी, कल्याण और पुणे के बीच चलाया गया था। उसके बाद इसे बॉम्बे से पुणे के बीच अमीर यात्रियों, जिनमें अंग्रेज ही होते थे उनके लिए पुणे रेस कोर्स में घुड़दौड़ देखने जाने के लिए चलाया गया। 13 साल बाद ​1943 में भारतीयों को भी इस ट्रेन में सफर की अनुमति दी गई। बाद में इसे दैनिक में बदल दिया गया।

​इंग्लैंड में बने थे अंडरफ्रेम कोच

​इंग्लैंड में बनाए गए थे अंडरफ्रेम कोच इस ट्रेन के विस्टाडोम कोच छत को पारदर्शी कांच से बनाया गया है। लेकिन शुरू में ही इसे डिलक्स तरीके से ही बनाया गया। कोच को चांदी के रंग में लाल रंग की मोल्डिंग के साथ रंगा गया था। इसके रेकों के कोच के अंदर के फ्रेम को इंग्लैंड में बनाया गया था, जबकि कोचों के ढांचे ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे की माटुंगा वर्कशॉप में बनाए गए। शुरू में प्रथम और द्वितीय श्रेणी की सीटें शामिल थीं, लेकिन 1 जनवरी, 1949 को प्रथम श्रेणी को एक नए डिजाइन वाली द्वितीय श्रेणी से बदल दिया गया। फिर जून 1955 में तृतीय श्रेणी भी शुरू की गई।

​ दर्ज हैं कई रिकॉर्ड

डेक्कन क्वीन के ​नाम पर कई रिकॉर्ड दर्ज हैं। यह भारत की पहली सुपरफास्ट ट्रेन है, बल्कि यह देश की पहली लंबी दूरी की इलेक्ट्रिक ट्रेन है। इसके अलावा, यह पहली वेस्टिब्यूल वाली ट्रेन, 'महिलाओं के लिए आरक्षित' डिब्बे वाली पहली ट्रेन और डाइनिंग कार वाली पहली ट्रेन है।

ट्रेन महोत्सव

डेक्कन क्वीन ट्रेन की ऐतिहासिकता एवं विशेषता को देखते हुए मध्य रेल मुम्बई मंडल ने अपनी प्रतिष्ठित डेक्कन क्वीन एक्सप्रेस (ट्रेन सं. 12123/12124) के “ट्रेन महोत्सव” का आयोजन 27 मार्च को सीएसएमटी पर किया है। मध्य रेलवे के अनुसार उत्सव की शुरुआत प्रस्थान समय शाम 5:10 बजे से एक घंटे पूर्व की जाएगी। ट्रेन को आकर्षक पुष्प सज्जा से सजाया जाएगा, जो इसकी भव्यता को दर्शाएगी। ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियों के माध्यम से डेक्कन क्वीन के समृद्ध इतिहास को प्रदर्शित किया जाएगा।

हुए हैं कई और सुधार

समय के साथ इस ट्रेन में वैक्यूम ब्रेक कोच से आधुनिक जर्मन तकनीक आधारित एलएचबी कोचों तक विकसित हुई है, जिससे सुरक्षा एवं आराम में वृद्धि हुई है। डेक्कन क्वीन में यात्रियों की सुविधा बढ़ाने और इसकी विरासत को संरक्षित रखने कई सुधार किए गए हैं। इनमें डाइनिंग कार को विरासत शैली में नवीनीकृत किया गया है, जिसमें फर्नीचर, छत एवं फर्श का उन्नयन कर प्रीमियम भोजन अनुभव सुनिश्चित किया गया है। शौचालयों में विनाइल, ड्यूरो वाइप मैट, साबुन एवं टिश्यू डिस्पेंसर लगाए गए हैं, जिससे स्वच्छता में सुधार हुआ है।एसी कोचों में सीट कवर लगाए गए हैं तथा दरवाजों के पास विनाइल की सुविधा प्रदान की गई है। छत एवं पैनल बोर्ड को आकर्षक थीम के साथ पुनः डिज़ाइन किया गया है। एयर फ्रेगरेंस डिस्पेंसर लगाए गए हैं।

ट्रेन नहीं,समृद्ध विरासत: डॉ नीला

मध्य रेल के सीपीआरओ डॉ स्वप्निल नीला ने कहा कि डेक्कन क्वीन केवल एक ट्रेन नहीं, बल्कि भारतीय रेल की समृद्ध विरासत है। इस ट्रेन ने पीढ़ियों के यात्रियों को जोड़े रखा है। अपने समृद्ध इतिहास और निरंतर आधुनिकीकरण के साथ यह मध्य रेल की परंपरा एवं नवाचार के समन्वय की प्रतिबद्धता का प्रतीक बनी हुई है।

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