CBI का बड़ा खुलासा: महाराष्ट्र में साइबर फ्रॉड रैकेट, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जांच के घेरे में
CBI ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जांच में फर्जी कॉल सेंटर, मनी लॉन्ड्रिंग और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कथित संलिप्तता सामने आने से मामला गंभीर हो गया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
CBI Busts Cyber Fraud Racket: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने महाराष्ट्र में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जिसमें पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की कथित संलिप्तता सामने आई है।
जांचकर्ताओं ने खुलासा किया है कि महाराष्ट्र पुलिस के 2 वरिष्ठ अधिकारी जिनमें एक आईजीपी रैंक के अधिकारी और एक पुलिस आयुक्त शामिल हैं। कथित तौर पर इगतपुरी और अन्य क्षेत्रों में चल रहे फर्जी कॉल सेंटरों को संरक्षण प्रदान कर रहे थे।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का परिवार भी शामिल
जांच में 10 से अधिक फजी संस्थाओं और लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप का पता चला है। जिनका उपयोग, अवैध धन को वैध बनाने (मनी लॉन्ड्रंग) के लिए किया जा रहा था। ये कंपनियां रियल एस्टेट, हॉस्पिटैलिटी और कंसल्टेंसी जैसे क्षेत्रों में पंजीकृत थीं। लेकिन इनका कोई वास्तविक व्यावसायिक संचालन नहीं था।
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CBI अधिकारियों का ये हैं मानना
अधिकारियों का मानना है कि इन फर्मों का निर्माण मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी, जबरन वसूली और ‘हफ्ता’ वसूली से प्राप्त काली कमाई को सफेद करने के लिए किया गया था। सीबीआई के अनुसार इन संदिग्ध कंपनियों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के परिवार के सदस्य पत्नी, बेटी और बेटा साझेदार के रूप में शामिल हैं।
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LLP संरचना का दुरुपयोग
- इसके अतिरिक्त कुछ राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवारों के व्यक्तियों के भी इन फर्मों से जुड़े होने के आरोप है। आईजीपी रैक के अधिकारी ने स्वीकार किया है कि उनके परिवार के नाम पर कंपनियां बनाई गई थीं, हालांकि उन्होंने उन्हें ‘विफल उद्यम’ बताया है।
- जांचकर्ताओं ने पाया कि आरोपियों ने जानबूझकर एलएलपी मॉडल को चुना क्योंकि यह वित्तीय खुलासों में लचीलापन प्रदान करता है। पिछले चार वर्षों में स्थापित ये कंपनियां आपस में जुड़ी हुई थी और एक ही पते का उपयोग कर रही थीं। सीबीआई अब इन संस्थाओं के वित्तीय रिकॉर्ड और लेनदेन के विवरणों का बारीकी से विश्लेषण कर रही है ताकि इस संगठित सिंडिकेट की पूरी गहराई का पता लगाया जा सके। फिलहाल मामले में विस्तृत जांच जारी है।
