

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती दिखाई।
मुंबईकर दिवाली के दौरान करीब 145 टन पटाखे जलाते हैं।
इससे हवा में 6 टन से अधिक महीन प्रदूषक कण घुलने का दावा।
सार्वजनिक सड़कों, गलियों, फुटपाथों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर पटाखे फोड़ने पर रोक।
आवाज फाउंडेशन ने पटाखों के पैकेट पर दर्ज जानकारी और केमिकल की वास्तविक जांच में अंतर का मुद्दा उठाया।
Bombay High Court Green Crackers HC Restrictions: दिवाली पर पटाखों से होने वाले प्रदूषण को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश दिए हैं। मुंबई में हर साल करीब 145 टन पटाखे जलाए जाते हैं, जिनसे हवा में 6 टन से अधिक महीन कण घुलने का दावा है। कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने पर रोक लगाई है। वहीं, आवाज फाउंडेशन ने पटाखों के पैकेट पर दर्ज केमिकल और क्यूआर कोड की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।
मुंबई, दिवाली पर पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि दिवाली के दौरान पटाखे फोड़ने के लिए निश्चित समय तय करने और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर विचार किया जाए। कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल और प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है।
आंकड़ों के अनुसार, दिवाली के दौरान मुंबईकर करीब 145 टन पटाखे जलाते हैं। इससे हवा में 6 टन से अधिक महीन प्रदूषक कण घुलने का दावा किया गया है। इसमें प्रतिबंधित पटाखों से होने वाला प्रदूषण भी शामिल है। हर साल दिवाली से पहले ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल और आतिशबाजी के समय को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका पालन कराना चुनौती बना रहता है।
हाईकोर्ट ने पूरे साल सार्वजनिक सड़कों, गलियों, फुटपाथों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध लगाया है। इसके बाद मुंबई पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 163 के तहत आदेश जारी कर सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने के साथ लेजर लाइट और तेज रोशनी के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई है।
बिना वैध लाइसेंस के सार्वजनिक स्थानों पर पटाखों की बिक्री, भंडारण और प्रदर्शन पर भी पाबंदी लगाई गई है। पुलिस के सामने अब इन निर्देशों का सख्ती से पालन कराने की चुनौती है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पटाखों के निर्माण या बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। हालांकि, प्रदूषण कम करने के लिए ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल और आतिशबाजी के लिए समय-सीमा तय करने पर जोर दिया गया है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार, बीएमसी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जागरूकता अभियान चलाने तथा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
आवाज फाउंडेशन की सुमेरा अब्दुलाली ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर पटाखों की गुणवत्ता और पैकेट पर दी गई जानकारी को लेकर चिंता जताई है। फाउंडेशन के अनुसार, 5 नवंबर को मुंबई के एक बाजार से खरीदे गए पटाखों के ध्वनि स्तर की जांच महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ की गई थी। इसकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी गई है।
फाउंडेशन वर्ष 2012 से पटाखों में मौजूद रसायनों और भारी धातुओं की स्वतंत्र जांच कर रहा है। संस्था का दावा है कि जांच में सामने आए नतीजों और पटाखों के पैकेट पर लिखे केमिकल कंपोनेंट में अंतर पाया गया है।
आवाज फाउंडेशन ने यह भी सवाल उठाया है कि कुछ पटाखों के पैकेट पर क्यूआर कोड नहीं हैं, जबकि कुछ पर नकली क्यूआर कोड पाए गए हैं। संस्था का दावा है कि स्वतंत्र रासायनिक जांच में बेरियम के निशान भी मिले हैं, जिस पर प्रतिबंध है और जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
इससे पटाखों की आवाज के स्तर के साथ-साथ उनमें इस्तेमाल होने वाले रसायनों और पैकेट पर दी गई जानकारी की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हुए हैं।