लाडली बहना की तर्ज पर BMC की ‘स्वाभिमान निधि योजना’, महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये देने का प्रस्ताव

BMC Swabhiman Nidhi Scheme: घरेलू कामगार और असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए प्रस्तावित स्वाभिमान निधि योजना को मंजूरी देने की मांग तेज हो गई है।
BMC Swabhiman Nidhi Scheme News
बीएमसी स्वाभिमान निधि स्कीम (सौ. AI Generated Image )
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BMC Swabhiman Nidhi Scheme News: घरों में काम करने वाली महिलाओं तथा असंगठित क्षेत्र में कार्यरत महिला कामगारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित 'स्वाभिमान निधि योजना' को राज्य सरकार द्वारा तत्काल मंजूरी देने की मांग तेज हो गई है।

बीएमसी की विपक्ष की नेता किशोरी किशोर पेडणेकर ने राज्य सरकार से इस महत्वपूर्ण योजना को शीघ्र लागू करने की अपील की है। गौरतलब है कि यह योजना शिवसेना यूबीटी के घोषणा पत्र में थी। पार्टी ने बीएमसी चुनाव में वादा किया था कि अगर वह बीएमसी में जीत दर्ज कर सत्ता बनाती हैं, तो महिलाओं को 3 हजार रुपये दिया जाएगा।

लाडकी बहिण योजना की तर्ज पर तैयार की गई इस योजना के तहत स्वरोजगार तथा असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को प्रतिमाह 2,500 से 3,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव है।

क्या है BMC की स्वाभिमान निधि योजना?

इस संबंध में सभागृह नेता गणेश खणकर को लिखित प्रस्ताव सौंपा गया था, जिस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए इसे राज्य सरकार के पास मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। किशोरी पेडणेकर ने कहा कि मनपा चुनावों के दौरान शिवसेना (यूबीटी) ने घरेलू कामगार महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का वादा किया था। बढ़ती महंगाई, घरेलू खर्चों में वृद्धि और आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए महिलाओं को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना समय की आवश्यकता है।

5 लाख महिलाओं को मिलेगा लाभ

मनपा आयुक्त अश्विनी भिडे ने इस योजना का विस्तृत प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है, जिस पर अंतिम निर्णय सरकार को लेना है। प्रस्ताव में उल्लेख किया गया है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली अनेक महिलाएं अचानक उत्पन्न होने वाले आर्थिक संकटों के कारण कठिन परिस्थितियों का सामना करती है।

ऐसे में नियमित आर्थिक सहायता उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सूत्रों के अनुसार, इस योजना से मुंबई की लगभग 5 लाख महिलाओं को लाभ मिल सकता है। यदि योजना लागू होती है, तो बीएमसी पर हर महीने 75 से 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है।

इस प्रस्ताव का राजनीतिक महत्व भी काफी बढ़ गया है। किशोरी पेडणेकर ने मार्च में यह प्रस्ताव सदन के नेता एवं भाजपा नगरसेवक गणेश खणकर को सौंपा था। खणकर ने भी इसका समर्थन करते हुए इसे स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे के पास भेजा और बजटीय प्रावधानों की संभावना जांचने की सिफारिश की। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने 2024 में 'मुख्यमंत्री माझी लाडली बहना योजना' शुरू की थी, जिसके तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1,500 रुपये की सहायता दी जा रही है।

26 वार्ड कार्यालयों के माध्यम से पात्र महिलाओं का सर्वे

  • इस योजना के लगभग 1.7 करोड़ लाभार्थी है और सरकार पर हर महीने करीब 2,500 करोड़ रुपये का खर्च आता है। राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद मनपा के 26 वार्ड कार्यालयों के माध्यम से पात्र महिलाओं का सर्वे और पंजीकरण किया जाएगा। सत्यापन के लिए ई-श्रम पोर्टल का उपयोग किया जा सकता है, जबकि गैर-पंजीकृत कामगारों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया जा सकता है।
  • हालांकि, वित्तीय चुनौती भी कम नहीं है। बीएमसी की अवसंरचना परियोजनाओं पर वर्तमान देनदारी 2।13 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, जबकि उसकी जमा निधि घटकर 81,449 करोड़ रुपये रह गई है। ऐसे में योजना के वित्तपोषण को लेकर अंतिम निर्णय राज्य सरकार को लेना होगा। यदि इस योजना को मंजूरी मिलती है, तो यह देश की किसी नगर निगम द्वारा असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए शुरू की जाने वाली पहली प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण योजना बन सकती है।
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