प्रजा फाउंडेशन की रिपोर्ट से बीएमसी बेनकाब, मुंबई में प्रदूषण की शिकायतें 531% बढ़ीं, स्वच्छता में नहीं मिली

Mumbai News: प्रजा फाउंडेशन की वर्ष 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में पिछले एक दशक में प्रदूषण की शिकायतें 531% और कचरा प्रबंधन की शिकायतें 281% बढ़ी हैं। बीएमसी को 1-स्टार रेटिंग भी नहीं मिली।
According to Praja Foundation's 2026 report, pollution complaints in Mumbai rose by 531% over a decade, while BMC failed to secure even a 1-star clean rating.
प्रदूषण प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - AI)
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Mumbai Pollution Complaints Praja Foundation Report 2026: मुंबई बीएमसी के पर्यावरण संरक्षण और ठोस कचरा प्रबंधन की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। प्रजा फाउंडेशन की वर्ष 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, बीएमसी के बड़े बजट के बावजूद पर्यावरण, स्वच्छता और बुनियादी नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक दशक के दौरान प्रदूषण, कचरा प्रबंधन, जलापूर्ति और वर्षा जल निकासी जैसी मूलभूत सेवाओं से संबंधित समस्याएं काफी बढ़ी हैं।

नहीं मिली स्टार रेटिंग

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016 से 2025 के बीच प्रदूषण से संबंधित शिकायतों में 531 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी शिकायतें 281 प्रतिशत बढ़ी है, शहर को कचरा मुक्त बनाने के दावों के बावजूद बीएमसी को 'स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25' में 1-स्टार रेटिंग भी प्राप्त नहीं हो सकी, जिससे स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए है।

कचरा प्रबंधन की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई के 87 प्रतिशत बड़े आवासीय परिसरों में स्रोत स्तर पर कचरे का प्रसंस्करण नहीं किया जाता, जिससे कारण प्रतिदिन 6,300 मीट्रिक टन कचरा सीधे डंपिंग ग्राउंड भेजा जा रहा है।

मुंबई की नदियों की स्थिति अब भी बनी हुई गंभीर

मुंबई शहर की नदियों की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मीठी नदी में फीकल कोलीफॉर्म (मलजनित बैक्टीरिया) का स्तर निर्धारित मानकों से हजारों गुना अधिक होकर 9,200 एमपीएन तक पहुंच गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि सीवेज शोधन संयंत्रों की कार्यप्रणाली अपेक्षित स्तर पर प्रभावी नहीं है और इस क्षेत्र में किए जा रहे दावों तथा जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है।

पर्यावरण के अलावा बुनियादी नागरिक सेवाओं को लेकर भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। पिछले दस वर्षों में जलापूर्ति से संबंधित शिकायतों में 96 प्रतिशत, जबकि वर्षा जल निकासी (ड्रेनेज) से जुड़ी शिकायतों में 88 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। हर वर्ष मानसून के दौरान जलभराव और कई इलाकों में दूषित पानी की आपूर्ति जैसी समस्याओं को भी रिपोर्ट ने गंभीर चिंता का विषय बताया है।

तत्काल प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता

रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व बीएमसी आयुक्त सिताराम कुंटे ने कहा कि बीएमसी के कामकाज में नागरिकों की बढ़ती भागीदारी एक सकारात्मक संकेत है। लोगों द्वारा अपनी समस्याएं अधिक संख्या में प्रशासन तक पहुंचाई जा रही हैं, इसलिए शिकायतों में वृद्धि दिखाई दे रही है।

हालांकि, प्रदूषण और ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी शिकायतें बेहद गंभीर हैं और इन पर मुंबई मनपा को तत्काल प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। प्रजा फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिलिंद म्हस्के ने कहा कि नागरिकों को स्थानीय समस्याओं को सक्रिय रूप से दर्ज कराना चाहिए।

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