

BMC Leaders Vehicle Demand: मुंबई की पहचान उसकी रफ्तार है, और इस रफ्तार की धड़कन है मुंबई लोकल। रोज़ाना लाखों मुंबईकर इस लोकल ट्रेन में डिब्बे के अंदर धक्का-मुक्की सहते हुए, पसीने में तर-बतर होकर और झटके सहते हुए अपने दफ्तर पहुंचते हैं। लेकिन जरा ठहरिए! अगर आप सोचते हैं कि जनता के ये 'झटके' उनके प्रतिनिधियों को भी महसूस होते होंगे, तो आप गलत हैं। एशिया की सबसे अमीर महानगरपालिका, बीएमसी के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जो आम आदमी के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी है।
मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि बीएमसी के दिग्गज नेताओं जिनमें सदन के नेता, उपमहापौर, विभिन्न समितियों के अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष शामिल हैं ने मौजूदा सरकारी गाड़ियों को रिजेक्ट कर दिया है। वजह जानकर आप दंग रह जाएंगे। इन नेताओं का कहना है कि महज कुछ महीने पहले खरीदी गई 20 लाख रुपये से अधिक की स्कॉर्पियो-एन में उन्हें झटके लगते हैं और उनकी पीठ में दर्द होता है। अब इन कोमल शरीर वाले नेताओं को अपनी सवारी के तौर पर इनोवा क्रिस्टा चाहिए, ताकि उनका सफर मखमली हो सके।
हैरानी की बात यह है कि ये स्कॉर्पियो गाड़ियां अभी नई नवेली हैं और जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपये खर्च कर खरीदी गई थीं। लेकिन अब इन गाड़ियों को अधिकारियों को दे दिया जाएगा और नेताओं की पीठ बचाने के लिए फिर से लाखों रुपये पानी की तरह बहाकर नई इनोवा गाड़ियां खरीदी जाएंगी। म्युनिसिपल कमिश्नर के सामने जल्द ही यह शाही प्रस्ताव पेश होने वाला है।
महिंद्रा कंपनी ने स्कॉर्पियो N का मतलब न्यू रखा था, पर बीएमसी नेताओं के लिए इसका मतलब नो हो गया है। अब उन्हें इनोवा क्रिस्टा का कम्फर्ट चाहिए, भले ही जनता का बजट डिस्कम्फर्ट में चला जाए। जनता का सवाल है कि नेताओं की छोड़ी हुई गाड़ियां अब अधिकारियों को मिलेंगी। यानी जो गाड़ी नेताजी की पीठ तोड़ रही थी, अब वह अधिकारियों की सेवा करेगी। क्या अधिकारियों की पीठ लोहे की बनी है?
एक तरफ मुंबई शहर पानी की किल्लत से जूझ रही है और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में मासूमों की जान जा रही है, वहीं दूसरी तरफ बीएमसी में गाड़ियों का खेल चल रहा है। यह वाकई विडंबना है कि जो जनप्रतिनिधि जनता की तकलीफें दूर करने का दावा करते हैं, उनकी सबसे बड़ी तकलीफ एक लग्जरी एसयूवी की सीट है। जनता झटके खाने के लिए बनी है और नेताजी मलाई खाने के लिए।