Mumbai Debris Control Tracking System: निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे की अवैध डंपिंग पर रोक लगाने के लिए बीएमसी ने बड़ा कदम उठाया है। शहर और उपनगरों में निर्माण एवं तोड़फोड़ के मलबे (सीडी वेस्ट) के संग्रह, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए 'मुंबई डेब्रिस कंट्रोल एंड ट्रैकिंग सिस्टम' (एमडीसीटीएस) शुरू किया गया है।
इसके तहत मलबे की आवाजाही को डिजिटल तरीके से ट्रैक किया जाएगा। बीएमसी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, https://mdets। megm।gov।in/ वेबसाइट पर इस सुविधा का लाभ लिया जा सकता है।
बिल्डर, डेवलपर, सरकारी और अर्धसरकारी एजेंसियां, बुनियादी ढांचा प्राधिकरण, मुंबई बीएमसी ठेकेदार, ट्रांसपोर्टर, वास्तुकार, परियोजना सलाहकार, स्टोन क्रशर संचालक और खुदाई अथवा निर्माण कार्य करने वाली संस्थाओं के लिए वेबसाइट पर पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।
एमडीसीटीएस के माध्यम से मलबा उत्पन्न होने के स्थान से लेकर उसके अधिकृत प्रसंस्करण केंद्र या निर्धारित डंपिंग स्थल तक पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा। कचरा प्रबंधन योजना को मंजूरी देने, अधिकृत ट्रांसपोर्टर और वाहन चुनने, निर्धारित डंपिंग स्थल का चयन, डिजिटल भुगतान तथा कचरा प्राप्ति की रसीद जैसी सुविधाएं भी इस प्रणाली में उपलब्ध होंगी।
मलबा ले जाने वाले प्रत्येक वाहन में व्हीकल ट्रैकिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (वीटीएमएस) सक्रिय होना जरूरी होगा। जीपीएस के माध्यम से वाहनों के निर्धारित मार्ग में बदलाव, अनधिकृत डंपिंग और नियमों के उल्लंघन पर नजर रखी जाएगी। बिना वाहन ट्रैकिंग प्रणाली के मलबे का परिवहन करने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर प्रत्येक वाहन पर प्रत्येक मामले में 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
बीएमसी ने स्पष्ट किया है कि खुदाई से निकलने वाली मिट्टी, मुरुम और पत्थरों को कंक्रीट, ईटों और अन्य सीडी मलबे से अलग रखना होगा। दोनों प्रकार की सामग्री का परिवहन केवल अधिकृत मार्ग और निर्धारित स्थानों पर ही किया जाएगा। मुंबई मे सड़कों के किनारे, खाली भूखंडों, खाड़ियों, जलाशयों और मैग्रोव क्षेत्रों में मलबे की अवैध डंपिंग से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के साथ धूल प्रदूषण और नागरिकों को परेशानी होती है।