जब तक पानी नहीं, तब तक नई इमारतों को OC-CC नहीं, मुंबई में जलसंकट के बीच भाजपा नेता ने BMC से कर दी ये मांग

Mumbai Water Crisis: मुंबई में गहराते जल संकट के बीच भाजपा नेता पंकज यादव ने बीएमसी से नए रिहायशी और कमर्शियल भवनों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और कमेंसमेंट सर्टिफिकेट जारी करने पर रोक लगाने की मांग की।
Pankaj Yadav On Mumbai Water Shortage
भाजपा मुंबई के उपाध्यक्ष पंकज यादवसोर्स: सोशल मीडिया
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Pankaj Yadav On Mumbai Water Shortage: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में गहराते जल संकट के बीच एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दा गरमा गया है। भाजपा मुंबई के उपाध्यक्ष पंकज यादव ने शहर की गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार और बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) से एक बेहद महत्वपूर्ण मांग की है।

उन्होंने कहा है कि जब तक मुंबई में पानी की आपूर्ति पूरी तरह से पटरी पर नहीं आ जाती, तब तक नए रिहायशी और कमर्शियल भवनों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) और कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (CC) जारी करने पर पूरी तरह से अस्थायी रोक लगा दी जानी चाहिए।

दूर-दराज के इलाकों में पानी के लिए मची त्राहि-त्राहि

पंकज यादव ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पालकमंत्री आशीष शेलार, भाजपा मुंबई अध्यक्ष अमित साटम, महापौर रितु तावर्ड और मनपा आयुक्त अश्विनी भिड़े को एक पत्र भेजकर इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है।

भाजपा मुंबई के उपाध्यक्ष ने अपने पत्र में लिखा कि इस समय पूरी मुंबई पानी की भीषण किल्लत से जूझ रही है। बीएमसी द्वारा की जा रही पानी की कटौती का सबसे बुरा असर शहर के दूर-दराज के इलाकों और अंतिम छोर पर रहने वाले आम नागरिकों पर पड़ रहा है।

उदाहरण के तौर पर, जोगेश्वरी पूर्व के प्रभाग क्रमांक 72 के लोग इस समय पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं और उनकी दैनिक परेशानियां काफी बढ़ गई हैं।

Pankaj Yadav On Mumbai Water Shortage
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नए निर्माणों से बढ़ेगा बुनियादी ढांचे पर बोझ

भाजपा नेता पंकज यादव का तर्क है कि यदि इस संकट के समय में भी नई इमारतों को धड़ाधड़ निर्माण शुरू करने की अनुमति (CC) और कब्जा प्रमाण पत्र (OC) दिया जाता रहा, तो शहर में नए निवासियों का आना जारी रहेगा। नई आबादी के आने से मुंबई शहर की पहले से ही चरमराई हुई जल आपूर्ति व्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर भारी अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

पंकज यादव ने कहा कि यदि पहले से ही दबाव झेल रही इस व्यवस्था को समय रहते नहीं संभाला गया, तो आने वाले दिनों में मुंबई का जल संकट और ज्यादा भयानक रूप अख्तियार कर सकता है। इसलिए सरकार को इस पर तुरंत नीतिगत फैसला लेते हुए प्रमाणपत्र जारी करने की एक सीमा तय करनी चाहिए।

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