सड़क पर थमी बेस्ट की ई-बसें, चार्जिंग संकट से प्रभावित सेवा; यात्री बेहाल, निजी ऑपरेटर पर लापरवाही के आरोप

Mumbai BEST E Bus: ओलेक्ट्रा द्वारा बिजली बिल न भरने से बेस्ट के मझास और गोराई डिपो में ई-बसों की चार्जिंग ठप। बसों की संख्या घटने से मुंबई के यात्री हुए परेशान।
BEST e-bus services disrupted in Mumbai after operator Olectra fails to pay electricity bills, halting charging at key depots; passengers hit hard.
बेस्ट की ई-बसें (फोटो. सोशल मीडिया)
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Mumbai BEST E-Bus Charging Crisis: मुंबई निजी ऑपरेटर ओलेक्ट्रा निजी ऑपरेटर ओलेक्ट्रा की कथित चूक सामने आई है। ऑपरेटर द्वारा बिजली बिल का समय पर भुगतान नहीं किए जाने से ई-बसों की चार्जिंग व्यवस्था प्रभावित हुई है। आरोप है कि अदानी पावर कंपनी ने बकाया बिल के चलते मझास डिपो, गोराई डिपो समेत कुछ अन्य डिपो की बिजली आपूर्ति बंद कर दी। इससे कई इलेक्ट्रक बसों की चार्जिंग नहीं हो सकी और बसें समय पर सड़कों पर नहीं उतर पाई हैं।

बेस्ट सेवा के पटरी से उतरने की वजह से हजारों यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे न केवल उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं, बल्कि अतिरिक्त खर्च कर वैकल्पिक परिवहन का सहारा लेना पड़ रहा है। यह मुद्दा बेस्ट समिति के सदस्य व भाजपा प्रवक्ता अजय सिंह ने समिति की अध्यक्ष तृष्णा विश्वासराव को भेजे गए पॉइंट ऑफ ऑर्डर के माध्यम से उठाया है।

उन्होंने इस पूरे मामले की तत्काल जांच कर दोषी निजी ऑपरेटर के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। अजय सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि बेस्ट बस सेवा के सुचारु और निर्बाध संचालन के लिए ई-बसों की चार्जिंग सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने बताया कि निजी ऑपरेटरों को किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी न हो। इसके लिए बेस्ट प्रशासन प्रत्येक माह की सात तारीख से पहले उनके देयक की 80 प्रतिशत राशि का नियमित भुगतान करता है।

ऑटो, टैक्सी का लेना पड़ा सहारा

पत्र के अनुसार, बिजली आपूर्ति बाधित होने से कई ई-बसें समय पर सेवा में शामिल नहीं हो सकीं। इससे विभिन्न मार्गों पर बसों की संख्या कम हो गई और यात्रियों को लंबे समय तक बसों का इंतजार करना पड़ा। कई यात्रियों को मजबूरी में ऑटो, टैक्सी या - अन्य निजी परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ा, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक - बोझ भी पड़ा।

मुंबई के यात्रियों को झेलनी पड़ रही है परेशानी

अजय सिंह ने कहा कि सड़कों पर बसों की संख्या कम होने से यात्रियों को रोजाना भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेका व्यवस्था के कारण बेस्ट की छवि भी प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि एक ओर बसों के उचित रखरखाव के अभाव में दुर्घटनाएं हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ निजी कंपनियों द्वारा संचालित बसों की स्थिति बेहद खराब है।

बस में छाता खोलने को मजबूर

अजय सिंह ने कहा कि बरसात के दौरान कई बसों में पानी टपकता है और यात्रियों को बस के भीतर छाता खोलकर सफर करना पड़ता है। कई बसों के दरवाजे ठीक से बंद नहीं होते, जबकि एसी बसों में यात्रा करने वाले यात्रियों को किराया पूरा चुकाने के बावजूद भीषण गर्मी और उमस में सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और बेस्ट की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए संबंधित निजी ऑपरेटर के खिलाफ कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है। साथ ही इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए ठोस और प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए।

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