

Maharashtra Political Row On Marathi: गैर-मराठी ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सिखाने के मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार में भारी कलह शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को अपने 'वीटो पावर' का इस्तेमाल करते हुए परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के सख्त फैसले को पलट दिया था। सीएम के इस एकतरफा कदम से सरनाईक सहित उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के कुछ अन्य मंत्री खासे नाराज हैं। सरकार के भीतर सहयोगी दलों के बीच इस मुद्दे पर सीधा टकराव देखने को मिल रहा है।
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रता सरनाईक ने चालकों के लिए मराठी सीखना अनिवार्य किया था। उन्होंने इसके लिए 15 अगस्त तक का समय दिया था। नियम के अनुसार मियाद पूरी होने पर लाइसेंस तीन महीने के लिए रद्द किया जा सकता था।
इस बीच गुरुवार को ऑटो चालकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सीएम देवेंद्र से मुलाकात की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने चालकों को बड़ी राहत देते हुए एक साल की मोहलत दे दी। अब एक साल तक किसी भी चालक पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।
इस फैसले के बाद मंत्री प्रताप सरनाईक ने तंज कसते हुए कहा कि अब सभी गैर मराठी चालक फटाफट मराठी बोलेंगे। हालांकि, उन्होंने बाद में यह भी कहा कि मुख्यमंत्री का आदेश उनके लिए बंधनकारक है। लेकिन ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि अंदरखाने महायुति में मुख्यमंत्री एवं बीजेपी के खिलाफ शिवसेना के मंत्रियों-नेताओं में जबरदस्त आक्रोश है।
सूत्रों की माने तो विश्वास में लिए बिना लिए गए मुख्यमंत्री फडणवीस के एकतरफा फैसले से शिवसेना के मंत्री खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। उनका सवाल है कि अगर एकतरफा फैसले लेने हैं तो कैबिनेट बैठक क्यों होती है?
रिक्शा-टैक्सी चालकों के खिलाफ मराठी भाषा का शस्त्र चलाकर सरनाईक और शिवसेना ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना यूबीटी और राज ठाकरे की मनसे के मराठी वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास किया था लेकिन सीएम देवेंद्र ने सरनाईक के फैसले को पलट कर शिवसेना की झटका दिया। इससे खासकर मनसे को एक बार फिर से मराठी के मुद्दे पर हावी होने का मौका मिल गया।
मनसे नेता अमित ठाकरे ने कहा है कि जो गैर मराठी रिक्शा टैक्सी चालक मराठी नहीं बोलेंगे या मराठी लोगों से बदतमीजी करेंगे उन्हें मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। तो वहीं यूबीटी के सांसद संजय राउत ने मुख्यमंत्री फडणवीस पर तंज कसते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आदेश के बाद मराठी अनिवार्य के निर्णय को कूड़ेदान में फेंक दिया गया। दिल्ली से डंडा पड़ा और मुख्यमंत्री ने इस फैसले को पलट दिया।
यह भी कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के फैसले के खिलाफ राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) कोर्ट जाने की तैयारी भी कर रही है। मनसे परिवहन सेना का आरोप है कि कुछ गैर-मराठी चालकों को नियमों का पालन किए बिना वाहन चलाने के अनुमति-पत्र और पहचान-पत्र जारी किए गए।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना टॅक्सी चालक/मालक संघ के अध्यक्ष संजय नाईक ने कहा कि संगठन अपने पास मौजूद दस्तावेज और प्रमाण अदालत में पेश करेगा। संगठन को न्यायपालिका पर भरोसा है और अब इसी माध्यम से कार्रवाई की मांग की जाएगी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के फैसले पर मराठी एकीकरण समिति ने भी नाराजगी जताई है। समिति के अध्यक्ष गोवर्धन देशमुख ने कहा कि फैसले के विरोध में दो दिन बाद मराठी नागरिकों के साथ सड़क पर उतरेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला राजनीतिक कारणों से लिया गया है। समिति का कहना है कि चालकों को यात्रियों से दैनिक बातचीत के लिए आवश्यक मराठी सीखना जरूरी है।
गोरेगांव पूर्व की आरे कॉलोनी में भाजपा रिक्शा यूनियन ने मुख्यमंत्री के फैसले का स्वागत किया और जश्न मनाया। भाजपा कामगार आघाड़ी के अध्यक्ष अभिजीत राणे ने मनसे को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उत्तर भारतीय रिक्शा चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई तो उसी अंदाज में जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चालकों को मराठी सीखने के लिए एक साल का समय मिलना राहत का फैसला है।