

Antilia Bomb Scare: उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास 'एंटीलिया' के बाहर विस्फोटक मिलने और व्यवसायी मनसुख हिरेन की हत्या के चर्चित मामले में, शनिवार को एक विशेष अदालत ने बड़ा कदम उठाया है। घटना के पांच साल बाद अदालत ने बर्खास्त पुलिस अधिकारियों सचिन
वाजे, सुनील माने और प्रदीप शर्मा सहित 10 आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत आतंकवाद और हत्या के आरोप तय कर दिए हैं।
हालांकि, सभी आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया है। इस मामले में अधिकतम सजा मृत्युदंड का प्रावधान है। यह मामला 25 फरवरी 2021 का है, जब दक्षिण मुंबई स्थित एंटिलिया के पास विस्फोटकों से भरी एक स्कॉर्पियो एसयूवी बरामद की गई थी।
इसके कुछ ही दिनों बाद 4 मार्च 2021 को वाहन मालिक मनसुख हिरन की हत्या कर दी गई थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का दावा है कि सचिन वाजे इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड था।
उसने उद्योगपति और समाज के धनी व्यक्तियों के मन में डर पैदा कर उनसे वसूली करने के मकसद से इस साजिश को अंजाम दिया था। एनआईए के अनुसार, मनसुख हिरेन की हत्या इसलिए की गई क्योंकि उसने विस्फोटकों से लदी गाड़ी की जिम्मेदारी अपने सिर लेने से इनकार कर दिया था। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि हिरेन साजिश की एक कमजोर कड़ी था। जो पूरे मामले का पर्दाफाश कर सकता था।
इसी कारण वाजे, माने, शर्मा और अन्य सह-आरोपियों ने मिलकर हिरन के अपहरण और हत्या की साजिश रची। अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में औपचारिक रूप से मुकदमे की सुनवाई (ट्रायल) शुरू होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।