

Anand Dubey Attacks Raghav Chadha: भारतीय राजनीति के गलियारों में आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मची भगदड़ ने विपक्षी गठबंधन की एकता पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और छह अन्य सांसदों के भाजपा में शामिल होने की खबर पर शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने न केवल राघव चड्ढा को आड़े हाथों लिया, बल्कि अरविंद केजरीवाल की नेतृत्व क्षमता पर भी गंभीर सवाल उठाए।
आनंद दुबे ने अपने चिर-परिचित मजाकिया और तंजिया अंदाज में राघव चड्ढा के दलबदल पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी को बना दिया है नया अड्डा और आम आदमी पार्टी के लिए खोद दिया है नया गड्ढा, उनका नाम है राघव चड्ढा। दुबे ने आगे कहा कि भाजपा ने पूरे देश में ऐसा माहौल बना दिया है कि विपक्ष का अस्तित्व ही खतरे में नजर आ रहा है। उन्होंने हैरानी जताते हुए पूछा कि यदि 10 में से 7 सांसद ही पार्टी छोड़कर दूसरी तरफ चले जाते हैं, तो फिर पीछे बचता ही क्या है?
आनंद दुबे ने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि केजरीवाल जी, आप अपनी पार्टी को संभाल नहीं पा रहे हैं। आपने अपनी पार्टी को नहीं संभाला है। अगर आपने आज अपनी पार्टी संभाली होती और जिन नीतियों को लेकर आप आए थे, उन पर अडिग रहे होते, तो हमें आज यह दिन नहीं देखना पड़ता।
दुबे का इशारा उन बुनियादी मूल्यों की ओर था जिन पर आम आदमी पार्टी का गठन हुआ था। उन्होंने कहा कि सांसदों का इतनी बड़ी संख्या में टूटना यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर गहरा असंतोष है जिसे समय रहते दूर नहीं किया गया।
शिवसेना (UBT) प्रवक्ता ने बीजेपी की रणनीति पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि आज ऐसा वातावरण तैयार कर दिया गया है कि विपक्षी नेताओं को अपना भविष्य केवल सत्ता पक्ष के साथ ही सुरक्षित नजर आ रहा है। 7 सांसदों का एक साथ पाला बदलना लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।
आनंद दुबे का यह बयान विपक्षी गठबंधन INDIA के भीतर की दरार को भी उजागर करता है। जहां एक ओर विपक्ष एकजुट होने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सहयोगी दल ही एक-दूसरे की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं। राघव चड्ढा जैसे कद्दावर चेहरे का पार्टी छोड़ना अरविंद केजरीवाल के लिए न केवल एक बड़ा झटका है, बल्कि यह भविष्य की राजनीति के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है।