पेपर लीक पर मिले उम्रकैद की सजा, वंदे मातरम पर न हो विवाद... शिवसेना UBT नेता आनंद दुबे का बड़ा बयान

Life Imprisonment for Paper Leak: शिवसेना UBT नेता आनंद दुबे ने पेपर लीक पर उम्रकैद की सजा की मांग की। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए और संसद में चर्चा हो।
anand dubey paper leak statement life imprisonment vande mataram controversy
आनंद दुबे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Anand Dubey Paper Leak Statement: शिवसेना यूबीटी प्रवक्ता आनंद दुबे ने पेपर लीक, हर घर तिरंगा अभियान और वंदे मातरम बिल समेत कई अहम मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर विधेयक पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए, जबकि पेपर लीक जैसे अपराधों के खिलाफ अत्यंत कठोर कानून बनाया जाना चाहिए ताकि देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

मीडिया से बातचीत में आनंद दुबे ने कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है। हर विषय पर गंभीर और सार्थक चर्चा होनी चाहिए। जब भी कोई विधेयक सदन में आता है तो उसका ड्राफ्ट सदस्यों के सामने रखा जाता है, जिसके बाद उसके लाभ, हानि और प्रभावों पर चर्चा होती है। विपक्ष हमेशा रचनात्मक चर्चा के लिए तैयार रहता है, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी दलों को विश्वास में लेकर सदन चलाए।

वंदे मातरम मातृभूमि के प्रति सम्मान का प्रतीक

वंदे मातरम के विरोध का कोई सोच भी नहीं सकता, क्योंकि यह देश की मातृभूमि के प्रति सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक है। यदि हम अपनी मातृभूमि की वंदना नहीं करेंगे तो फिर किसकी करेंगे। वंदे मातरम विधेयक समेत अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी सदन में खुलकर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि विपक्ष को विश्वास में लेकर व्यापक चर्चा कराई जाए, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और अधिक मजबूत हो।

पेपर लीक देश के लिए दीमक की तरह

पेपर लीक के मुद्दे पर आनंद दुबे ने कहा कि यह देश के लिए दीमक की तरह है, जो धीरे-धीरे व्यवस्था को खोखला कर सकता है। परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ ऐसा सख्त कानून बनाया जाना चाहिए, जिससे भविष्य में कोई भी इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न कर सके।

सरकार ने प्रस्तावित कानून में 10 वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपए के जुर्माने की बात कही है, लेकिन इस पर और व्यापक चर्चा होनी चाहिए। सजा और अधिक कठोर होनी चाहिए ताकि यह दूसरों के लिए भी नजीर बने। वर्ष 2015, 2016, 2021, 2024 और 2026 में भी पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं और हालिया मामले में 13 लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जिसकी जांच सीबीआई कर रही है।

पेपर लीक के लिए आजीवन कारावास के प्रावधान की मांग

आनंद दुबे ने आगे कहा कि आवश्यकता पड़ने पर पेपर लीक जैसे गंभीर अपराधों में आजीवन कारावास जैसे प्रावधानों पर भी विचार किया जाना चाहिए। साथ ही, आर्थिक दंड भी इतना कठोर होना चाहिए कि अपराध करने वाले भविष्य में दोबारा ऐसा करने की कल्पना भी न कर सकें। उनके अनुसार परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए पेपर लीक के खिलाफ मजबूत और प्रभावी कानून समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com