एमपीएससी आंदोलन, पेपर लीक और हिंजेवड़ी का खराब इंफ्रास्ट्रक्चर! आदित्य ठाकरे का महायुति सरकार पर तीखा हमला

Aaditya Thackeray On MPSC Protest: MPSC छात्रों के आंदोलन, पेपर लीक और हिंजेवड़ी के खराब बुनियादी ढांचे को लेकर ठाकरे गुट नेता आदित्य ठाकरे ने महायुति सरकार पर जोरदार हमला बोला।
aaditya thackeray attacks mahayuti government over mpsc protest
आदित्य ठाकरे(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Aaditya Thackeray Attacks Mahayuti Government: शिवसेना यूबीटी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए पेपर लीक मामले को लेकर सरकार को घेरा है।

इसके साथ ही उन्होंने हिंजेवड़ी के खराब बुनियादी ढांचे, सड़कों की बदहाल स्थिति, कचरे और पानी की समस्या को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। आदित्य ठाकरे ने एमपीएससी के छात्रों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को युवाओं और छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए।

राहुल गांधी के प्रयासों की सराहना

उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में राहुल गांधी के कार्यक्रमों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, मेरा मानना ​​है कि राहुल गांधी हर जगह की स्थिति पर नजर रख रहे हैं।

ऐसे कार्यक्रम कर रहे हैं और देश भर में 'छात्रों की गूंज' और युवाओं की आवाज को बुलंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र और युवा जिन समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उन्हें सामने लाना और उनकी आवाज को मजबूती देना जरूरी है।

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पेपर लीक और एमपीएससी विरोध प्रदर्शन

पेपर लीक के मुद्दे पर आदित्य ठाकरे ने सरकार को घेरते हुए कहा कि परीक्षाओं की पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य से जुड़ा यह बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने कहा, पेपर लीक हो रहे हैं। कल एमपीएससी के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन है और हमने सभी छात्रों को अपना समर्थन दिया है।

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हिंजेवड़ी की बदहाली और आईटी क्षेत्र पर असर

उन्होंने कहा, आपने हिंजवडी की सड़कें देखी होंगी, साथ ही वहां कचरे और पानी की समस्याएं भी देखी होंगी। हम इस इलाके को देश के आईटी सेक्टर का एक प्रमुख केंद्र मानते हैं। अगर आईटी कंपनियां यहां से बाहर जाने लगें तो सरकार क्या कर रही है? वह किस तरह के रोजगार पैदा कर पाएगी।

उन्‍होंने कहा कि मांगें बहुत ही प्राथमिक हैं, लेकिन यही बात है कि 2026 में भी लोग प्राथमिक जरूरतों के लिए सड़कों पर आ रहे हों तो सरकार की क्‍या स्थिति है, यह समझा जा सकता है।

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