14 साल बाद विद्यार्थियों को तोहफा! हॉस्टल भत्ते में बड़ी बढ़ोतरी, छात्राओं को भी खास राहत

Mumbai News: राज्य सरकार ने 14 साल बाद हॉस्टल विद्यार्थियों के भत्ते में बढ़ोतरी की घोषणा की, जिससे हजारों छात्रों को राहत मिली है। हालांकि महंगाई को देखते हुए इसे पर्याप्त नहीं माना जा रहा है।
सावित्रीबाई फुले गर्ल्स हॉस्टल (pic credit; social media)
सावित्रीबाई फुले गर्ल्स हॉस्टल (pic credit; social media)
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Maharashtra Hostel Allowance: आखिरकार 14 साल लंबा इंतजार खत्म हुआ। राज्य सरकार ने सामाजिक न्याय विभाग के अधीन चल रहे हॉस्टलों में रहने वाले विद्यार्थियों को बड़ी राहत देते हुए उनके निर्वाह भत्ते में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है। यह निर्णय हजारों विद्यार्थियों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है, क्योंकि लंबे समय से छात्र लगातार भत्ते बढ़ाने की मांग कर रहे थे।

सामाजिक न्याय विभाग की ओर से जारी जीआर में स्पष्ट किया गया है कि विभागीय, जिला और तालुका स्तर के हॉस्टलों के लिए अलग-अलग भत्ते तय किए गए हैं। नई दरें इसी माह से लागू होंगी। विभागीय स्तर पर हॉस्टल में रहने वाले छात्रों का भत्ता 800 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दिया गया है। जिला स्तर के हॉस्टलों का भत्ता 600 रुपये से बढ़ाकर 1,300 रुपये और तालुका स्तर पर यह 500 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये कर दिया गया है।

इतना ही नहीं, छात्राओं के लिए विशेष रूप से दिए जाने वाले स्वच्छता भत्ते में भी बढ़ोतरी की गई है। पहले यह केवल 100 रुपये था, जिसे बढ़ाकर अब 150 रुपये कर दिया गया है। सरकार के इस कदम से छात्राओं ने राहत की सांस ली है।

वर्तमान में राज्य भर में 441 शासकीय हॉस्टल कार्यरत हैं, जिनमें 230 लड़कों और 211 लड़कियों के लिए हैं। इनकी कुल क्षमता 43,890 छात्रों की है, जिनमें 23,570 लड़के और 20,320 लड़कियां शामिल हैं। लेकिन यह भी हकीकत है कि नियम के अनुसार हर 5 साल में भत्ते की समीक्षा होनी चाहिए थी, जबकि पिछले 14 साल से यह समीक्षा नहीं की गई।

एक छात्र ने भावुक होते हुए कहा– “आज के समय में 800 या 600 रुपये में गुजारा करना मुश्किल हो गया था। सरकार ने राशि जरूर बढ़ाई है, लेकिन इतनी लंबी देरी के बाद यह राहत थोड़ी देर से आई है।”

सरकार के इस फैसले ने छात्रों में खुशी तो जगाई है, लेकिन कई छात्रों का मानना है कि महंगाई को देखते हुए यह बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या भविष्य में सरकार समय पर समीक्षा करती है या छात्रों को फिर सालों तक इंतजार करना पड़ेगा।

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