Mumbai: 26/11 हमले के 17 साल बाद भी समुद्री सुरक्षा कमजोर, 23 पेट्रोल बोट्स खराब

Mumbai: 26/11 हमले के 17 साल बाद भी मुंबई की समुद्री सुरक्षा में गंभीर खामियां हैं। 23 पेट्रोल बोट्स खराब, 60% से अधिक मरीन पुलिस पद खाली और तटीय निगरानी बेहद कमजोर है, जिससे खतरा बना हुआ है।
Mumbai Maritime Security
मुंबई समुद्री सुरक्षा (सौ. सोशल मीडिया )
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Maritime Security Of Mumbai: 26/11 आतंकी हमले को आज 17 साल पूरे हो गए। उस भयावह रात की यादें आज भी मुंबईकरों के जेहन में ताजा हैं, और समुद्री रास्ते से आतंकियों के घुस आने का डर अब भी बना हुआ है।

26/11 के बाद समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के नाम पर केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर, मुंबई पुलिस को 23 नई हाई-स्पीड पैट्रोल बोट्स दी थी। उससे पहले 9 बोट्स थीं, यानि कुल 32 बोट्स।

लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि ये तमाम बोट्स आज मझगांव के लकड़ा पोर्ट स्थित मुंबई पुलिस बोट डिपार्टमेंट के गैरेज में खड़ी धूल फांक रही हैं। ज्यादातर बोट्स या तो खराब हैं या रखरखाव के अभाव में चलने की हालत में नहीं हैं।

69 पेट्रोल बोट्स में से 23 बोट्स खराब

महाराष्ट्र के 878 किलोमीटर लंबी तटीय इलाके की सुरक्षा के लिए कुल 69 पेट्रोल बोट्स की जरूरत है। लेकिन इनमें से 23 बोट्स इस समय खराब हालत में हैं। तटीय इलाकों में लैंडिंग पॉइंट्स पर सीसीटीवी कैमरे नाकाफी हैं। रात के समय गश्त करने वाले सिक्योरिटी गार्ड तैनात नहीं हैं।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि हजारों की संख्या में बिना रजिस्ट्रेशन, और बिना अनुमति वाली मछली पकड़ने की नावें तट पर बेरोकटोक घूम रही हैं। सरकारी दावे तो बहुत हैं कि "महाराष्ट्र का पूरा समुद्र तट सुरक्षित है, लेकिन हकीकत इसके उलट है।

मरीन पुलिस का एक स्टेशन माहिम मछुआरे कॉलोनी से चल रहा है, जबकि दूसरा स्टेशन (मरीन पुलिस स्टेशन-2) अक्सा चौपाटी पर जगह न मिलने की वजह से बोरीवली पश्चिम के योगी नगर में अस्थायी तौर पर चलाया जा रहा है। दोनों स्टेशनों को अभी तक स्वतंत्र एग्जीक्यूटिव दर्जा भी नहीं मिला है।

464 कर्मचारियों की जगह सिर्फ 172 की तैनाती

  • केंद्र सरकार ने 3 और राज्य सरकार ने 23 फास्ट पेट्रोल बोट्स दी थी। लेकिन स्टाफ की भारी कमी के कारण ये बोट्स येली गेट और, मरीटाइम पुलिस स्टेशन से सीमित पुलिसकर्मियों की मदद से ही गश्त कर पाती हैं।
  • समुद्री सुरक्षा के लिए कुल 464 कर्मचारियों की स्वीकृति मिली थी। लेकिन वास्तव में सिर्फ 172 कर्मचारी ही तैनात हैं। यानी 62-63% पद खाली पड़े हैं। 17 साल बीत जाने के बाद भी 26/11 जैसे हमले की आशंका को पूरी तरह खत्म करने में हम नाकाम रहे हैं।

सुरक्षा विशेषज्ञ बार बार चेता रहे हैं कि, मुंबई को समुद्र के रास्ते आज भी आसानी से निशाना बनाया जा सकता है। सरकारी दावों और हकीकत के बीच का यह खतरनाक फर्क जल्द से जल्द खत्म करना होगा, वरना एक और 26/11 को रोक पाना मुश्किल हो जाएगा।

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