

नासिक: नासिक में 2027 में सिंहस्थ कुंभ होने वाला है। इसके लिए महाराष्ट्र सरकार तैयारियों में जुट गई है। 10 मार्च को पेश हुए बजट में वित्त मंत्री अजित पवार ने सिंहस्थ कुंभ को तैयारियों को लिए कई किए। अजित पवार ने कहा कि ‘नमामि गोदावरी’ पहल की योजना तैयार की जा रही है। इस बीच महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) ने चौंकाने वाला दावा किया है।
एक तरफ गोदावरी नदी बेसिन में जलकुंभी की भरमार है, तो दूसरी तरफ नदी में सीवेज और नालों का पानी बहाया जा रहा है, फिर भी महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चौंकाने वाला दावा किया है कि नदी प्रदूषित नहीं है। एमपीसीबी के इस दावे पर पर्यावरणविदों ने संदेह जताया है।
कई सालों से स्थानीय प्रशासन और सरकारें गोदावरी नदी, जिसे दक्षिण की गंगा भी कहा जाता है, में प्रदूषण की समस्या को दूर करने के लिए काम कर रही हैं। नदी को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए कई प्रयास किए गए हैं, लेकिन महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि नदी प्रदूषित नहीं है, जिससे विवाद पैदा हो गया है।
गोदावरी नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए अब तक करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं और आगामी कुंभ मेले में नदी की सफाई के लिए हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। एक तरफ नदी को साफ करने की कोशिशें की जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने डेटा जारी कर दावा किया है कि गोदावरी नदी का पानी साफ है।
नासिक शहर में 6 जगहों से पानी के सैंपल लिए गए और वाटर क्वालिटी इंडेक्स (WQI) की जांच की गई। जांच में पता चला कि नदी का पानी साफ है और नदी प्रदूषित नहीं है, जैसा कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दावा किया है।
आगामी कुंभ मेले की पृष्ठभूमि में गोदावरी नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए जहां कदम उठाए जा रहे हैं, वहीं पर्यावरणविदों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दावों पर संदेह जताया है। बोर्ड के दावों को चुनौती देने के लिए पर्यावरणविद गोदावरी नदी के पानी के नमूने भी निजी प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजेंगे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस जांच से क्या निष्कर्ष निकलता है।