3 साल पहले मर चुकी महिला के नाम पर मतदान, क्या रद्द होगा सुकली (दे) का चुनाव?

Fake Voting case: भंडारा के मोहाड़ी में सुकली (दे) ग्राम पंचायत उपचुनाव में 3 साल पहले मृत महिला के नाम पर फर्जी मतदान का खुलासा। ग्रामीणों ने चुनाव आयोग से की कड़ी जांच की मांग।
Voting Cast in the Name of a Woman Who Died Three Years Ago: Will Sukli (De)'s Election Be Annulled?
फेक मतदान की प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Dead Voting Case: भंडारा जिले के मोहाड़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुकली (दे) गांव में ग्राम पंचायत उपचुनाव के दौरान एक ऐसा वाकया सामने आया है, जिसने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि यहां 28 अप्रैल को हुए मतदान में एक ऐसी महिला के नाम पर वोट डाला गया, जिसका निधन तीन साल पहले ही हो चुका है। इस 'फर्जीवाड़े' के उजागर होने के बाद गांव में हड़कंप मच गया है और उम्मीदवारों के बीच भारी रोष देखा जा रहा है।

नाम की समानता का उठाया गया फायदा?

पूरा मामला वार्ड क्रमांक 1 की रिक्त सीट के लिए हुए उपचुनाव से जुड़ा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस वार्ड की निवासी सुमित्रा श्रावण डोलस का लगभग तीन वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। आरोप है कि एक शातिर उम्मीदवार ने इस स्थिति का फायदा उठाने के लिए वार्ड क्रमांक 3 में रहने वाली उसी नाम (सुमित्रा डोलस) की दूसरी महिला को मतदान केंद्र पर बुलाया। मतदान प्रतिनिधियों (Polling Agents) और चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की नजरों से बचते हुए, मृत महिला के नाम पर वार्ड क्रमांक 3 की महिला से मतदान करवा लिया गया।

प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल

हैरानी की बात यह है कि जब तक मतदान प्रक्रिया चल रही थी, किसी का ध्यान इस गड़बड़ी की ओर नहीं गया। मतदान संपन्न होने के बाद जब गांव में यह चर्चा शुरू हुई कि मृत महिला के नाम का वोट डल चुका है, तब जाकर यह सनसनीखेज मामला सामने आया। ग्रामीणों का तर्क है कि जब चुनाव वार्ड क्रमांक 1 के लिए हो रहा था, तो वार्ड क्रमांक 3 की महिला का वोट वहां कैसे स्वीकार किया गया? क्या मतदाता सूची (Voter List) को अद्यतन (Update) नहीं किया गया था, या फिर यह जानबूझकर किया गया चुनावी भ्रष्टाचार है?

निष्पक्ष जांच और पुनर्मतदान की मांग

इस घटना के बाद भंडारा के सुकली (दे) गांव के नागरिकों ने चुनाव विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक मृत व्यक्ति के नाम पर फर्जी वोट डाला जा सकता है, तो पूरी चुनाव प्रक्रिया की शुचिता समाप्त हो जाती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या संबंधित वार्ड में पुनर्मतदान के आदेश दिए जाते हैं।