विलुप्त हो रही है खेतों की शान 'अमराई', साकोली में देसी आमों पर संकट, इतिहास बनने की कगार पर 'फलों का राजा'

Sakoli News: साकोली क्षेत्र में कभी वैभव का प्रतीक मानी जाने वाली देसी आमों की अमराई अब लुप्त हो रही है। देखरेख के अभाव और प्राकृतिक आपदाओं के कारण पुराने पेड़ काटे जा रहे हैं।
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Bhandara Agriculture News: साकोली एक समय ऐसा था जब ऐसा कोई खेत नहीं होता था, जिसमें देसी गांवरानी आम के वृक्ष न हों। देसी आम के वृक्षों से ही खेत वैभवशाली दिखते थे और किसान इन वृक्षों की देखभाल बहुत संजीदगी से करते थे, मगर पिछले कुछ सालों से संबंधित विभाग की उपेक्षा के चलते देसी आम के वृक्ष समाप्त होने लगे हैं। अमराई अब इतिहास में दर्ज होने की कगार पर आ गई है।

पहले फसल के साथ देसी आम की अमराई किसानों के वैभव की प्रतीक हुआ करती थी। खेतों में लगे देसी आम के वृक्ष विख्यात थे। उनमें दशेरी, लंगड़ा, गोटी, लालू, हलद्या, आंबीन, शेप्या, खोबर्या, बैंगन फल्ली, तोता फल्ली आदि प्रजातियां उत्कृष्ट मानी जाती हैं। अब अधिकांश वृक्ष काट दिए गए हैं। सातबारह के उतारे में वृक्षों की संख्या सर्वाधिक होती है, मगर देसी आम को बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। इसके चलते पिछले कुछ सालों में अमराई विलुप्त होने की कगार पर आ गई हैं।

काट दिए गए अधिकांश वृक्षपुराने वृक्षों के सूख जाने का कारण बताते हुए अधिकांश वृक्ष काट दिए गए। देसी आम बाजार से भी गायब होने लगा है। मगर फिर भी वडद, सुकड़ी, जमनापुर आलेबेदर, घानोड, वलमाझरी, खाबा, लवारी जाभंडी, बोदरा आदि जगहों पर आज भी अमराइयां देखी जा सकती हैं। यह स्थिति संतोषजनक नहीं है। अमराइयां अंतिम सांसें ले रही है।

आचार के लिए देसी कैरियों की भारी मांगआमों व कैरियों की दूसरे प्रांतों में भारी मांग है, मगर किसानों को इसके लिए नाममात्र की ही दर मिलती है। विदर्भ में अमराई का विकास हो, इसके लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा आम उत्पादक किसानों के खेतों में लगे आम के वृक्षों का निरीक्षण करवाया जाना चाहिए। अक्सर आंधियों या अतिवृष्टि से होने वाले नुकसान का मुआवजा दिया जाना चाहिए, यह अपेक्षा स्थानीय किसान कर रहे हैं।

आम खाना आम आदमी के बस का नहीं वासनिक सामाजिक कार्यकर्ता चुन्नीलाल वासनीक ने कहा कि, लगता है पिछले साल कि तरह इस साल भी आंधी और तूफान के कारण आम की फसल कम होंगी। जिससे आम खाना आम आदमी के बस का नहीं रहा है।

फलों का राजा इतिहास जमा हो जाएगा लांजेवार विक्रेता शंकर लांजेवार ने कहा कि, यदि शासन द्वारा आम के वृक्षों पर ध्यान नहीं दिया तो फलों का राजा इतिहास जमा हो जाएगा इसलिए किसानों को आम की फसल के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

नुकसान भरपाई दी जानी चाहिए पुस्तोडे स्थानीय किसान सागर पुस्तोडे ने कहा कि, आजकल अतिवृष्टि या फिर आंधी तूफान के कारण अक्सर फल की फसल का नुकसान होता है, शासन द्वारा नुकसान भरपाई दी जानी चाहिए जिससे किसानों का फ़सल और फल के उत्पादन को लेकर उत्साह बना रहेगा।

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