मजबूत गढ़ों में BJP की हार के क्या हैं मायने? MLC चुनाव में पार्टी दिग्गजों के नेतृत्व पर सवाल!

MLC Election Results BJP: चार राज्यों की 28 एमएलसी सीटों में एनडीए ने 16 और बीजेपी ने 12 सीटें जीतीं। हालांकि, वाराणसी, नागपुर और पुणे जैसे क्षेत्रों में हार ने नए राजनीतिक सवाल खड़े किए हैं।
MLC Election Results BJP Setback In Maharashtra And Uttar Pradesh
PM नरेंद्र मोदी और CM देवेन्द्र फडणवीस(डिजाइन फोटो)
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Highlights

  • महाराष्ट्र की 5 में से बीजेपी को 1 सीट।

  • कर्नाटक की चारों सीटें बीजेपी-जेडीएस गठबंधन ने जीतीं।

  • दो निर्दलीय उम्मीदवार भी विजयी रहे।

  • 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले नतीजों पर चर्चा तेज।

BJP Setback In Maharashtra And UP: महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश सहित 4 बड़े राज्यों में हुए विधानपरिषद चुनाव में बीजेपी भले ही सबसे ज्यादा सीटें जीती,परंतु अपने मजबूत गढ़ों में हार से नए सियासी संकेत मिलने लगे हैं। चार राज्यों की 28 विधानपरिषद सीटों पर एनडीए ने 16 सीटें जीतकर बढ़त जरूर बनाई, लेकिन उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में पार्टी दिग्गजों के प्रभाव वाली प्रतिष्ठित सीटों पर भाजपा को मिली शिकस्त ने निराश विपक्ष का राजनीतिक मनोबल बढ़ाने का काम किया है।

काशी, पटना, नागपुर का संदेश

एमएलसी की 28 सीटों में से बीजेपी अकेले सर्वाधिक 12 सीटों पर जीती है, लेकिन बावजूद इसके पार्टी वाराणसी, लखनऊ, पटना, दरभंगा, नागपुर, पुणे जैसे गढ़ों में हार गई है। इनमें वाराणसी पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र है,जबकि लखनऊ केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का इलाका है। इसी तरह नागपुर संघ का मुख्यालय होने के साथ राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गढ़ माना जाता हैं।

उन्हें प्रधानमंत्री का दावेदार भी माना जाता है। नागपुर की एमएलसी सीट पर 55 साल बीजेपी का कब्जा रहा है। बीजेपी के प्रभाव वाले पुणे से भी पार्टी को हार से विपक्ष और शरद पवार की पार्टी को संजीवनी मिल गई है। महाराष्ट्र एमएलसी की 5 सीटों में बीजेपी को मात्र 1 सीट मिली है।

इसी तरह पटना बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन नवीन का प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता रहा है। पटना शिक्षक सीट पर उसके उम्मीदवार नवल किशोर यादव 30 साल से काबिज थे। वहीं, यूपी के सीएम योगी के प्रभुत्व वाले गोरखपुर में पार्टी हारते हारते बची। इस तरह बीजेपी के शीर्ष व दिग्गज नेताओं के गढ़ में एमएलसी का चुनाव हारना बड़ा राजनीतिक संकेत दे रहा है।

उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले विपक्ष का मनोबल बढ़ा

उत्तर प्रदेश की 11 सीटों में भाजपा ने 6 और सपा ने पांच 5 जीतीं। आंकड़ों में भाजपा भले ही आगे है, लेकिन वाराणसी की शिक्षक और स्नातक दोनों सीटों पर सपा की जीत के बाद हौसले बढ़े हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र में भाजपा की हार से विपक्ष का मनोबल बढ़ गया है।

लखनऊ स्नातक और इलाहाबाद-झांसी स्नातक और आगरा सीट पर भी सपा की सफलता से शहरी क्षेत्र में पकड़ वाली बीजेपी की मुश्किलें बढ़ीं हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव के लिए यह परिणाम उत्साह बढ़ाने वाला माना जा रहा है। इससे मुख्यमंत्री योगी के लिए भी बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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बीजेपी का बैलेंस सत्ता समीकरण

तीन राज्यों में विपक्ष से शिकस्त खाने वाली बीजेपी ने कांग्रेस पार्टी शासित कर्नाटक में बड़ी जीत हासिल की। यहां जेडीएस के साथ गठबंधन में चारों सीटें जीत ली है। उल्लेखनीय है कि एसआईआर, वोट चोरी और बैलेट पेपर पर चुनाव कराने के बड़े मुद्दों के बीच प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस को नागपुर छोड़ और कहीं से सफलता नहीं मिल पाई है।

कुछ राजनीतिक रणनीतिकारों के बीच यह भी चर्चा है कि बीजेपी सत्ता का समीकरण बनाना जानती है। कुछ प्रमुख सीटों पर बीजेपी की हार से विपक्ष जरूर गदगद हुआ है,परंतु पार्टी एक छोटी हार के बाद बड़ी जीत का स्वाद चखना भी जानती है। पार्टी नेताओं को लग रहा है कि एमएलसी चुनाव का असर एमएलए चुनाव पर इतना नहीं पड़ेगा।

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शिक्षित और जेनजी मतदाता भाजपा से दूर हो रहे हैं?

वैसे ये एमएलसी चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए इसलिए भी अहम थे, क्योंकि इस चुनाव में स्नातक यानी ग्रेजुएशन पास करने वाले वोटरों ने वोट डाला है, जिसे समाज का प्रबुद्ध वर्ग माना जाता है। वे रोजगार, महंगाई, शिक्षा की गुणवत्ता, भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दे उनके मतदान को प्रभावित करते हैं।

हालांकि, इन नतीजों के आधार पर जेनजी मतदाताओं के भाजपा से दूर होने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। क्योंकि 28 एमएलसी सीटों में 16 पर बीजेपी और उसके सहयोगियों को सफलता मिली है। दो निर्दलीय भी विजयी रहे। कर्नाटक की चारों सीटें भाजपा-जेडीएस गठबंधन के खाते में जाना एनडीए के लिए बड़ी उपलब्धि रही है।