‘मी पुन्हा येईन…’ 2019 में कही गई वो बात जो आज सच साबित हो गई, जानिए एक नजर में CM देवेंद्र फडणवीस का राजनीति सफर
आज यानी 5 दिसबंर को देवेंद्र सरिता गंगाधरराव फडणवीस ने राज्य मुख्यमंत्री के रूप में तीसरी बार शपथ ली। विधानसभा चुनाव में महायुति की ऐतिहासिक जीत के बाद आज मुंबई के आजाद मैदान में शपथ ग्रहण समारोह हुआ।
- Written By: आकाश मसने
(डिजाइन फोटो)
नवभारत डेस्क: आज यानी 5 दिसबंर को देवेंद्र सरिता गंगाधरराव फडणवीस ने राज्य मुख्यमंत्री के रूप में तीसरी बार शपथ ली। विधानसभा चुनाव में महायुति की ऐतिहासिक जीत और 10 दिनों की बहस के बाद 4 दिसंबर को बीजेपी ने ऐलान किया कि फडणवीस भाजपा विधायक दल के नेता और राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे।
2019 में विधानसभा में कही गई वाे बात जो आज सच हो गई। ‘मी पुन्हा येईन’ यानी मैं लौटकर आऊंगा। साल 2019 में महायुति को बहुमत मिलने के बावजूद शिवसेना ने भाजपा से गठबंधन तोड़कर कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली थी। इसके बाद देवेंद्र फडणवीस का विधानसभा में शायराना अंदाज सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था।
‘मैं समंदर हूं, लौटकर वापस आऊंगा’
साल 2019 में विधानसभा सत्र के दौरान देवेंद्र फडणवीस ने शायराना अंदाज में कहा था कि “मेरा पानी उतरता देख, मेरे किनारे पर घर मत बसा लेना। मैं समंदर हूं, लौटकर वापस आऊंगा।” यह बात आज सच साबित हो गई। उन्होंने तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की शपथ ले ली। आइए अब एक नजर डालते है देवेंद्र फडणवीस के सफर पर।
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देवेंद्र फडणवीस का परिचय
देवेंद्र फडणवीस का जन्म नागपुर के मराठी ब्राह्मण हिंदू परिवार में गंगाधर फडणवीस और सरिता फडणवीस के घर 22 जुलाई 1970 को हुआ। देवेंद्र फडणवीस के पिता जनसंघ से जुड़े थे। पिता के जनसंघ में जुड़े होने के कारण देवेंद्र फडणवीस की राजनीति में शुरू से ही रुचि रही। घर के माहौल को देखते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए काम करना शुरू किया।
देवेंद्र फडणवीस की प्रारंभिक स्कूली शिक्षा नागपुर में हुई इसके बाद उन्होंने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से स्नातक किया। इसके बाद वे जर्मनी चले गए। बिजनेस मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर की डिग्री और डीएससी जर्मन फाऊंडेशन फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट बर्लिन से प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के तरीकों और तकनीक में डिप्लोमा किया।
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पार्षद से शुरू हुआ राजनीतिक करियर
देवेंद्र फडणवीस के राजनीतिक कैरियर की शुरुआत साल 1991 में हुई। आरएसएस से जुड़े होने के कारण महज 21 साल की उम्र में बीजेपी ने उन्हें नागपुर में पार्षद का चुनाव लड़ने का मौका दिया। इसके बाद फडणवीस की किस्मत ने करवट ली और वह 1997 में नागपुर के मेयर बन गए। वे इस पद पर 1999 तक रहे।
1999 ले पहली बार बने विधायक
देवेंद्र फडणवीस को 1999 में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने नागपुर पश्चिम सीट से अपना उम्मीदवार बनाया यहां से जीत दर्ज करने के बाद फडणवीस ने कभी मुड़कर नहीं देखा। उनका राजनीतिक कैरियर एक के बाद एक सफलता की सीढ़ियां चढ़ने लगा।
44 साल की उम्र में बने मुख्यमंत्री
2014 में बीजेपी की पारंपरिक सहयोगी शिवसेना ने उसका साथ छोड़ दिया दोनों ही पार्टियों अलग-अलग चुनाव लड़ी लेकिन चुनाव नतीजे किसी के पक्ष में नहीं आए। बीजेपी 122 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इसके बाद शिवसेना ने बीजेपी को समर्थन देकर राज्य में सरकार बनाई।
अब बारी थी बीजेपी को मुख्यमंत्री चुनने की। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जैसे बड़े नाम को दरकिनार करते हुए बीजेपी ने 44 साल के युवा विधायक देवेंद्र फडणवीस पर दांव खेला। 31 अक्टूबर 2014 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के 52 साल के इतिहास को तोड़ते हुए 5 साल अपनी सरकार चलाई। इससे पहले यह काम कांग्रेस के वसंतराव नाईक ने किया था।
महाराष्ट्र के राजनीति में सितारा बनकर उभरे फडणवीस
देवेंद्र फडणवीस को महाराष्ट्र की राजनीति का चाणक्य भी कहा जाता है। महाराष्ट्र के इतिहास में 52 साल बाद 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले वह पहले मुख्यमंत्री बने। इसके बाद उनका कद लगातार बढ़ता गया। सरल स्वभाव, आरएसएस की साथ और पीएम मोदी के करीबी होने के चलते उन्होंने महाराष्ट्र में अपनी पैठ जमाई।
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2019 में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर हुए विवाद से शिवसेना ने बीजेपी से गठबंधन तोड़ दिया। इस बीच देवेंद्र फडणवीस ने अजित पवार के साथ मिलकर 23 नवंबर 2019 को आधी रात में दूसरी बार मुख्यमंत्री की शपथ ली। हालांकि यह सरकार केवल 5 दिन ही चल सकी।
शिवसेना में हुई टूट में अहम रोल
2019 में शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाई और उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने लेकिन 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना में टूट हुई और उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाएं कहा जाता है कि शिवसेना में टूट और सरकार बनाने में देवेंद्र फडणवीस का महत्वपूर्ण रोल रहा।
