मुंबई मेट्रो वन को बड़ी राहत: 2,771 रुपए करोड़ के कर्ज पुनर्गठन समझौते से खत्म होगा वित्तीय संकट
Mumbai Metro One: मुंबई की पहली मेट्रो वन सेवा को ₹2,771 करोड़ के कर्ज पुनर्गठन समझौते से बड़ी राहत मिली है। इसके साथ ही कंपनी के खिलाफ चल रही दिवालियापन की कार्रवाई भी समाप्त होगी।
- Written By: रूपम सिंह
मुंबई मेट्रो वन (सोर्स: सोशल मीडिया)
Mumbai Metro One Debt Restructuring: मुंबई की पहली मेट्रो सेवा संचालित करने वाली मेट्रो वन को बड़े वित्तीय संकट से राहत मिली है। कंपनी के 1,100 करोड़ रुपए से अधिक के कर्ज में कमी की जाएगी। इसी के साथ ही उसके खिलाफ चल रही दिवालियापन की कार्रवाई भी समाप्त हो जाएगी।
सरकार समर्थित एनएआरसीएल के साथ 2,771 करोड़ रुपए के कर्ज पुनर्गठन समझौते से कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, जिससे वर्सोवा अंधेरी घाटकोपर मेट्रो कॉरिडोर पर प्रतिदिन सफर करने वाले 5 लाख से अधिक यात्रियों के लिए सेवाएं बिना किसी बाधा के जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है।
मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड एक संयुक्त उपक्रम है, जिसमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की 74 प्रतिशत और मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मुंबई की पहली मेट्रो लाइन मानी जाने वाली वर्सोवा अंधेरी घाटकोपर कॉरिडोर पर प्रतिदिन 5 लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं।
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यह कॉरिडोर काफी समय से वित्तीय संकट से जूझ रहा था। ऐसे में मुंबई मेट्रो वन ने संकट से उबरने के लिए सरकार समर्थित नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के साथ कर्ज पुनर्गठन समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का कुल मूल्य 2,771.32 करोड़ रुपए है। समझौते के तहत कंपनी के कर्ज का पुनर्गठन किया जाएगा, जिससे उसके वित्तीय बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी और परिचालन गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।
मेट्रो वन के प्रतिनिधियों की गठित होगी निगरानी समिति
समझौते के तहत एनएआरसीएल को मुंबई मेट्रो वन के निदेशक मंडल में एक निदेशक नामित करने का अधिकार मिलेगा। इसके अलावा, कर्जदाताओं और मेट्रो वन के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त निगरानी समिति गठित की जाएगी, जो पूरे पुनर्गठन कार्यक्रम की निगरानी करेगी।
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साथ ही समझौते की शर्तों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल कंपनी के वित्तीय पुनर्गठन तक सीमित नहीं है, बल्कि मुंबई के शहरी परिवहन तंत्र के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा।
कर्ज का बोझ कम होने से कंपनी भविष्य में परिचालन क्षमता बढ़ाने, यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता हासिल करने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेगी। इससे मुंबई शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजाना लाखों यात्रियों की यात्रा पहले की तरह सुचारु रूप से जारी रहेगी।
