नवभारत विशेष: सामाजिक समता की आधारशिला है महाड चवदार तालाब सत्याग्रह

Mahad Chavdar Tale Satyagraha: डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के ऐतिहासिक महाड सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष से पूर्व महाराष्ट्र सरकार ने चवदार तालाब के कायाकल्प के लिए 55.79 करोड़ की निधि मंजूर की।
Mahad Chavdar Tale Satyagraha
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का चवदार तालाब सत्याग्रह (डिजाइन फोटो)
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Dr. BR Ambedkar Satyagraha: भारतीय समाज व्यवस्था में समानता, स्वाभिमान और मानवाधिकारों के लिए खड़े हुए आंदोलनों में 'महाड चवदार तालाब सत्याग्रह' एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जाता है। भारत देश में एक जलकुंड (तालाब) को लेकर खड़ा हुआ यह संघर्ष केवल जल अधिकार के लिए नहीं था, बल्कि यह मानवीय अस्मिता और सामाजिक न्याय का संघर्ष था। महामानव, भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के क्रांतिकारी नेतृत्व में 20 मार्च 1927 को महाड में हुआ यह संघर्ष केवल पानी पीने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह हजारों वर्षों की दासता की बेड़ियों को तोड़कर मानवीय प्रतिष्ठा स्थापित करने का एक प्रस्थान बिंदु था। आज जब हम इस ऐतिहासिक घटना के शताब्दी वर्ष (2027) की पूर्व संध्या पर खड़े हैं। महाराष्ट्र शासन इस स्मृतिभूमि के कायाकल्प के लिए प्रतिबद्ध हैं।

बाबासाहेब आंबेडकर के दो महत्वपूर्ण बातें

चवदार तालाब सत्याग्रह के समय डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने अपने अनुयायियों को दो महत्वपूर्ण बातें बताई थीं जागृति की अग्नि को अखंड प्रज्वलित रखना और विचारों में परिवर्तन लाना। उन्होंने स्पष्ट किया था कि विचारों में परिवर्तन के बिना आचरण में परिवर्तन संभव नहीं है। बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा किए गए आंदोलन सामाजिक न्याय, समानता और जन्मसिद्ध अधिकारों को स्थापित करने के लिए थे। उनके संघर्ष का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त हीनता की भावना को दूर कर लोगों की मानसिकता में बदलाव लाना था। जल प्रकृति का उपहार है और वह सभी के लिए समान है, यह उन्होंने अपने कृत्य से सिद्ध किया। यह सत्याग्रह केवल पानी का प्रश्न नहीं था, बल्कि यह मानवाधिकारों और स्वाभिमान के लिए एक निर्णायक संघर्ष था। इस आंदोलन से अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा आज भी मिलती है।

शुद्ध जल ही बाबासाहेब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी

संजय शिरसाट ने लिखा कि सामाजिक न्याय मंत्री के रूप में उत्तरदायित्व स्वीकार करने के पश्चात, पिछले वर्ष 20 मार्च 2025 को मैंने महाड स्थित पवित्र चवदार तालाब का भ्रमण किया था। वहां अभिवादन समारोह के लिए आए अनुयायियों से संवाद करते समय एक बात स्पष्ट रूप से अनुभव हुई। अनेक अनुयायियों के मन में यह गहरी पीड़ा थी कि जिस तालाब ने विश्व को समता का संदेश दिया, उस तालाब का पानी आज दूषित (हरा) हो गया है और वह पीने योग्य नहीं रहा। उस जल को शुद्ध कर सभी को पुनः उसके मूल 'चवदार' (स्वादिष्ट) स्वरूप में उपलब्ध कराना ही बाबासाहाब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी, ऐसी प्रेरणा मुझे उसी क्षण मिली।

इस समस्या के स्थायी तकनीकी समाधान हेतु मैंने तत्काल जानकारी प्राप्त की। मुझे ज्ञात हुआ कि पंजाब के अमृतसर स्थित 'स्वर्ण मंदिर' में चौबीसों घंटे जल शुद्धिकरण करने वाला एक विशेष प्रकल्प सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। बिना विलंब किए, उसी तर्ज पर क्रांति और समता की प्रेरणा देने वाली ऊर्जाभूमि महाड के चवदार तालाब का कायाकल्प करने का निर्णय हमने लिया। इस संकल्प की पूर्ति हेतु राज्य शासन ने त्वरित कदम उठाते हुए 18 फरवरी 2026 को शासन निर्णय (GR) निर्गमित कर 55 करोड़ 79 लाख 85 हजार 653 रुपये की निधि स्वीकृत की है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 2026-27 को 'सामाजिक समता एवं समरसता वर्ष' के रूप में घोषित किया है। इस अवसर पर महाड स्थित चवदार तालाब, क्रांति स्तंभ और अन्य ऐतिहासिक स्थलों का विकास प्रारूप प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाएगा। महाड की इस भूमि को विश्व स्तरीय प्रेरणा स्थल बनाना ही शासन का दृढ़ संकल्प है। रायगढ़ के पालक मंत्री भरत गोगावले की उपस्थिति में इन कार्यों की प्रगति की समय-समय पर समीक्षा की गई है।

20 मार्च 2026 को, सत्याग्रह की 99वीं वर्षगांठ पर इन महत्त्वाकांक्षी जल शुद्धिकरण और सौंदर्याकरण कार्यों का वास्तविक 'शुभारंभ' हो रहा है, जो हम सभी के लिए गर्व का विषय है। अगले वर्ष जब हम इस सत्याग्रह का शताब्दी वर्ष (2027) मनाएंगे, तब यह परियोजना पूर्ण हो चुकी होगी। उस स्वर्णिम क्षण में चवदार तालाब का जल वास्तव में 'चवदार' होगा और प्रत्येक भीम-सैनिक उसे तृप्त होकर ग्रहण कर सकेगा, इसका मुझे पूर्ण विश्वास है।

चवदार तालाब सत्याग्रह दिवस

महाड का चवदार तालाब सत्याग्रह अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देने वाला प्रकाश स्तंभ है। शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सामाजिक विषमता के विरुद्ध संघर्ष को और अधिक सशक्त करने तथा समाज में समता के मूल्यों को स्थापित करने का संकल्प लेना ही महामानव डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

लेख- संजय शिरसाट, सामाजिक न्याय मंत्री महाराष्ट्र शासन के द्वारा

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