मराठवाड़ा में फसलों पर मंडराया सूखे का खतरा, कांग्रेस विधायक धीरज देशमुख ने उठाई कृत्रिम बारिश कराने की मांग

Marathwada Rain Crisis: मराठवाड़ा में बारिश न होने से खरीफ फसलें सूखने की कगार पर हैं। स्थिति बिगड़ते देख विधायक धीरज देशमुख ने सरकार से क्षेत्र में तत्काल कृत्रिम बारिश कराने की मांग की है।
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कांग्रेस विधायक धीरज देशमुख सोर्स: सोशल मीडिया
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Dheeraj Deshmukh Demand Cloud Seeding : मराठवाड़ा में बारिश के लंबे अंतराल ने खरीफ फसलों पर संकट गहरा दिया है। खेतों में खड़ी फसलें मुरझाने लगी हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कई इलाकों में कुओं, नालों और अन्य जलस्रोतों पर भी बारिश की कमी का असर दिखाई देने लगा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कांग्रेस नेता एवं विधायक धीरज देशमुख ने राज्य सरकार से केवल बारिश का इंतजार करने के बजाय वैज्ञानिक विकल्पों पर तत्काल विचार करने की मांग की है।

विधायक धीरज देशमुख ने की कृत्रिम बारिश की मांग

विधायक धीरज देशमुख ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार से मराठवाड़ा में क्लाउड सीडिंग यानी कृत्रिम बारिश की संभावनाएं तलाशने का आग्रह किया है।

उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि बारिश की कमी के कारण कई क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंचने की स्थिति बन रही है। ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए सरकार को उपलब्ध सभी वैज्ञानिक विकल्पों पर विचार करना चाहिए।

100 फीसदी बारिश की गारंटी नहीं

विधायक धीरज देशमुख ने स्पष्ट किया कि क्लाउड सीडिंग से बारिश होने की 100 फीसदी गारंटी नहीं होती। यह तकनीक तभी प्रभावी हो सकती है, जब आसमान में पर्याप्त नमी वाले और बारिश के अनुकूल बादल मौजूद हों। इसलिए मौसम की स्थिति का विशेषज्ञों द्वारा आकलन करने के बाद ही क्लाउड सीडिंग का प्रयोग किया जाना चाहिए।

क्या है क्लाउड सीडिंग?

क्लाउड सीडिंग में पहले से मौजूद उपयुक्त बादलों में विशेष सूक्ष्म कण या ‘सीडिंग एजेंट’ छोड़े जाते हैं। इन कणों के जरिए बादलों में पानी की बूंदों या बर्फ के कण बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाता है। इसके लिए विमान या अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, साफ आसमान में कृत्रिम रूप से बादल बनाकर बारिश कराना इस तकनीक से संभव नहीं है।

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क्लाउड सीडिंग का पहले भी हो चुका है प्रयोग

महाराष्ट्र में क्लाउड सीडिंग को लेकर पहले भी प्रयोग किए जा चुके हैं। पुणे स्थित भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) ने कैपेक्स परियोजना के तहत सोलापुर क्षेत्र में इस तकनीक का अध्ययन किया था। वर्ष 2023 में जारी अंतिम रिपोर्ट में अनुकूल मौसम परिस्थितियों में क्लाउड सीडिंग से बारिश बढ़ने के संकेत मिले थे।

ऐसे में मराठवाड़ा में मौजूदा बारिश संकट के बीच देशमुख ने सरकार से मौसम विशेषज्ञों की मदद लेकर क्लाउड सीडिंग की व्यवहार्यता जांचने और किसानों के हित में तत्काल निर्णय लेने की मांग की है।

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