

महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में लाडकी बहिन योजना के सितंबर किस्त पर चर्चा की संभावना है।
जुलाई और अगस्त की किस्तें पात्र महिलाओं के बैंक खातों में पहुंच चुकी हैं।
सितंबर और अक्टूबर माह की किस्तें एकसाथ यानी 3000 रुपए देने की भी चर्चा।
Ladki Bahin Yojana September Installment: अक्टूबर का आधा महीना बीत चुका है और नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो गया है, लेकिन महाराष्ट्र की लाडकी बहिन योजना की लाभार्थियों के मन में एक ही सवाल है कि सितंबर की ₹1,500 की किस्त कब आएगी? अगस्त का मानदेय सितंबर के अंतिम सप्ताह में ट्रांसफर किया गया था, जिसके बाद से महिलाएं सितंबर के पैसों का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं।
इस बीच, राज्य की महिलाओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। आज होने वाली महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट की बैठक में इस योजना के फंड और भुगतान को लेकर अहम फैसला लिए जाने की संभावना है।
बुधवार की कैबिनेट बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग और वित्त विभाग के बीच लाडकी बहिन योजना के बकाए भुगतान को लेकर चर्चा होगी। दशहरा के तुरंत बाद सिर्फ सितंबर महीने की ₹1,500 की किस्त महिलाओं के खातों में भेजी जाए या दिवाली के त्योहार को देखते हुए सितंबर और अक्टूबर दोनों महीनों की किस्त यानी कुल ₹3,000 एक साथ ट्रांसफर किए जाएं, इसे लेकर चर्चा भी हो सकती है।
महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना के तहत अब तक जुलाई और अगस्त की किस्तें समय पर लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी के जरिए पहुंचाई जा चुकी हैं। हालांकि, सितंबर के पैसों में हो रही देरी के पीछे राज्य के कुछ हिस्सों में सूखे जैसे हालात और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मुख्य वजह माना जा रहा है।
राज्य में इस बात की चर्चा है कि फडणवीस सरकार दिवाली के मौके पर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक साथ ₹3,000 का बड़ा तोहफा दे सकती है। अब देखना यह होगा की आज की कैबिनेट बैठक में क्या फैसला होता है।
बता दें कि महाराष्ट्र सरकार की मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना के तहत 21 से 65 वर्ष आयु वर्ग की पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह राशि कई महिलाओं के लिए नियमित आर्थिक सहारे का माध्यम बनी हुई है।
लाडकी बहिन योजना के तहत महिला की उम्र 65 वर्ष पूरी होने के बाद वह योजना की पात्रता से बाहर हो जाती है। ऐसे में उसके खाते में आने वाली 1,500 रुपए की मासिक सहायता राशि आना बंद हो जाती है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के सामने भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।