कोल्हापुर में गजब कारनामा! महिला उपसरपंच ने अपने ही खिलाफ दे दिया वोट, छिन गई कुर्सी

Kolhapur News: कोल्हापुर जिले से एक गजब मामला सामने आया है। यहां एक महिला उपसरपंच ने अविश्वास प्रस्ताव को लेकर अपने खिलाफ ही वोट दे दिया। इसके बाद उन्हें अपने पद से हाथ धोना पड़ा।
Kolhapur Khidrapuur Gram Panchayat Deputy Sarpanch voted against herself on no-confidence motion
कोल्हापुर जिले के खिद्रापुर ग्राम पंचायत (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Kolhapur Khidrapuur Gram Panchayat News: कोल्हापुर जिले के खिद्रापुर गांव में एक महिला उपसरपंच ने अविश्वास प्रस्ताव पर खुद के खिलाफ वोट देकर अपना पद गंवा दिया। घटना की जानकारी मिलने के बाद महिला ने तहसीलदार के सामने हंगामा भी किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस घटना के पीछे यह भ्रम बना हुआ है कि महिला ने यह कदम जानबूझकर उठाया या गलती से, क्योंकि इसकी अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है।

यह मामला कोल्हापुर के शिरोल तहसील स्थित खिद्रापुर ग्राम पंचायत का है। यहां की उपसरपंच पूजा शिवगोंडा पाटिल के खिलाफ 6 अगस्त को ग्रामपंचायत के कुछ सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव दाखिल किया था, जिसमें उन पर 'सदस्यों को विश्वास में लिए बिना काम करने' का आरोप लगाया गया था।

ग्रामपंचायत के सभी वोट गए खिलाफ

प्रकरण को लेकर तहसीलदार अनिल कुमार हेलकर ने विशेष सभा की अधिसूचना जारी की थी। मंगलवार दोपहर वोटिंग की प्रक्रिया शुरू हुई। इस दौरान ग्रामपंचायत के 10 में से किसी भी सदस्य ने पूजा पाटिल के पक्ष में वोट नहीं दिया-खुद उन्होंने भी नहीं। परिणामस्वरूप, अविश्वास प्रस्ताव 10-0 के मतों से पारित हो गया और पाटिल को उपसरपंच पद से हटना पड़ा। यह घटना राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है।

तहसीलदार के सामने मचाया जोरदार हंगामा

पूजा पाटिल को खुद का वोट भी नहीं मिला। जैसे ही यह स्थिति स्पष्ट हुई, तहसीलदार ने तुरंत उन्हें पद से मुक्त किए जाने की घोषणा कर दी। घटना से पूजा पाटिल को बड़ा झटका लगा। उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा था कि उन्होंने खुद वोट दिया, फिर भी उनके पक्ष में एक भी मत क्यों नहीं पड़ा।

जब उन्होंने गहराई से सोचा तो उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने गलती से खुद के खिलाफ ही वोट डाल दिया था। इस बात का एहसास होते ही उन्होंने तहसीलदार के सामने जोरदार हंगामा किया और पुनर्मतदान की मांग की। हालांकि, तब तक मतदान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।

तहसीलदार ने स्पष्ट रूप से उनकी मांग को ठुकरा दिया और कहा कि एक बार मतदान हो जाने के बाद उसे दोहराया नहीं जा सकता। यदि आपको यह निर्णय स्वीकार नहीं है, तो आप न्यायालय में अपील कर सकती हैं।

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