

Amit Shah Event Eknath Shinde Protocol: पश्चिमी महाराष्ट्र के ऐतिहासिक शहर कोल्हापुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भव्य दौरे के दौरान आज (20 जून 2026) एक ऐसा वाकया सामने आया, जिसने मंच पर मौजूद नेताओं के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज कर दी हैं। कोल्हापुर की आराध्य देवी अंबाबाई मंदिर के सौंदर्यीकरण परियोजना के उद्घाटन समारोह के दौरान आयोजकों की एक बड़ी प्रशासनिक चूक के कारण उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे असहज स्थिति में आ गए थे। हालांकि, मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की त्वरित सूझबूझ और हस्तक्षेप के कारण समय रहते उपमुख्यमंत्री पद की प्रतिष्ठा और प्रोटोकॉल को बचा लिया गया।
इस विशेष कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण सहित महायुति के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।
समारोह की शुरुआत में जब अतिथियों के स्वागत और सम्मान का सिलसिला शुरू हुआ, तो आयोजकों ने सबसे पहले देश के गृह मंत्री अमित शाह और फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सम्मानित किया। इसके बाद प्रोटोकॉल के अनुसार राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का सम्मान होना चाहिए था। लेकिन, आयोजकों ने सबको चौंकाते हुए सीधे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण का नाम सम्मान के लिए पुकार दिया। उपमुख्यमंत्री के रहते हुए बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष का नाम पहले पुकारे जाने से मंच पर कुछ पलों के लिए शांति छा गई और आयोजकों की इस बड़ी लापरवाही से उपमुख्यमंत्री खेमे को किरकिरी का सामना करना पड़ा।
जैसे ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण का नाम पुकारा गया, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की गंभीरता और प्रोटोकॉल के उल्लंघन को तुरंत भांप लिया। फडणवीस ने बिना किसी देरी के बीच में हस्तक्षेप किया और आयोजकों को टोकते हुए उनसे अनुरोध किया कि वे पहले उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का सम्मान करें। फडणवीस के दखल के बाद आयोजकों ने अपनी गलती सुधारी और पहले उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को सम्मानित किया गया, जिसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण का सत्कार संपन्न हुआ।
भले ही देवेंद्र फडणवीस की समझदारी से मंच पर बात संभल गई, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्रत्यक्ष मौजूदगी में हुई इस घटना को लेकर विपक्षी दल अब महायुति सरकार पर तंज कस रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल और 'ऑपरेशन टाइगर' के बाद राज्य में मची उथल-पुथल के बीच, सरकारी व सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस तरह की प्रोटोकॉल की गलतियां गठबंधन के भीतर समन्वय की कमी को दर्शाती हैं। हालांकि, फडणवीस के इस व्यवहार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे गठबंधन में समन्वय बनाए रखने के लिए कितने संवेदनशील रहते हैं।