नागपुर काचीपुरा अवैध निर्माण पर राज्य सरकार का फैसला; नगर विकास विभाग ने खारिज की अपील, चलेगा मनपा का बुलडोजर
Nagpur Demolition Action: रामदासपेठ के काचीपुरा में कृषि विद्यापीठ की जमीन पर अवैध निर्माणों के मामले में सरकार ने अपील खारिज कर दी। इससे मनपा की कार्रवाई और ध्वस्तीकरण का रास्ता साफ हो गया।
- Written By: अंकिता पटेल
काचीपुरा, अवैध निर्माण,(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
Nagpur Kachipura Illegal Construction: नागपुर जिले के रामदासपेठ स्थित काचीपुरा (मौजा लेंड्रा) में डॉ। पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ की जमीन पर बड़े पैमाने पर हुए अवैध निर्माणों को लेकर एक अहम फैसला आया है। महाराष्ट्र सरकार के नगर विकास विभाग ने अनधिकृत निर्माणकर्ताओं की अपील को खारिज कर दिया है, जिससे महानगर पालिका की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। महाराष्ट्र शासन के अपर मुख्य सचिव (नगर विकास) असीम कुमार गुप्ता ने यह आदेश पारित किया।
27 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जा
मौजा लेंडा के खसरा क्रमांक 104 से 201 तक फैली लगभग 27 हेक्टेयर जमीन पर दशकों से अवैध कब्जा है। यह जमीन डॉ। पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ, अकोला के अंतर्गत आती है। मनपा की रिपोर्ट के अनुसार, इस विशाल भूखंड पर बड़े पैमाने पर अनधिकृत निर्माण कर दुकानें, रेस्टोरेंट, गैरेज, लॉन्स और ऑटोमोबाइल सर्विसिंग जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलाए जा रहे हैं।
2015 में मनपा ने दिया था नोटिस
महानगर पालिका ने इन अवैध निर्माणों के खिलाफ वर्ष 2015 (मई और अगस्त) में एमआरटीपी (MR&TP) एक्ट 1966 की धारा 53 (1) के तहत डिमोलिशन (तोड़ कार्रवाई) के नोटिस जारी किए थे। इसके बाद सतीश सक्सेना, प्रशांत पवार, मंगेश सुरावार और अन्य लोगों ने निर्माण को नियमित करने के लिए धारा 44 के तहत आवेदन किया था। मनपा के नगर रचना विभाग ने 21 सितंबर और 3 अक्टूबर 2015 को इन नक्शों और आवेदनों को नामंजूर कर दिया था। मनपा की इस कार्रवाई के खिलाफ अपीलकर्ताओं ने राज्य सरकार के पास धारा 47 के तहत अपील दायर की थी।
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डीपी प्लान में आरक्षण तय
सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि मंजूर विकास योजना के अनुसार यह जमीन महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपयोगों के लिए आरक्षित है।
दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक (SCZCC) केंद्र
राज्य परिवहन (स्टेट ट्रांसपोर्ट)
पार्किंग
परिवार की आजीविका का हवाला
अपीलकर्ताओं का तर्क था कि वे इस जमीन पर कई वर्षों से काबिज हैं और यह व्यवसाय ही उनके और उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन है। उनका यह भी दावा था कि वे नियमित रूप से मनपा को टैक्स भर रहे हैं, जिसे मनपा स्वीकार भी कर रही है, इसलिए उनके निर्माण को अवैध नहीं ठहराया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने नोटिस को अस्पष्ट बताया और कहा कि उन्हें कार्रवाई के लिए एक महीने से कम का समय दिया गया था।
सरकारी जांच में सामने आए अहम तथ्य
सरकार द्वारा की गई सुनवाई और स्थल निरीक्षण के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। संपत्ति पत्रक (प्रॉपर्टी कार्ड) के अवलोकन से यह स्पष्ट हो गया कि इस जमीन की मूल मालिक महाराष्ट्र सरकार है और पट्टेदार (लीजधारक) के रूप में डॉ। पंजाबराव कृषि विद्यापीठ, अकोला दर्ज है। अपीलकर्ता जमीन पर अपना मालिकाना हक साबित करने में विफल रहे।
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अतिक्रमण मुक्त होगी 27 हेक्टेयर भूमि
इन सभी तथ्यों, जमीन के मालिकाना हक और विकास योजना के आरक्षण को गंभीरता से विचार में लेते हुए राज्य सरकार ने माना कि मनपा द्वारा निर्माण अनुमति को नामंजूर करने की कार्रवाई बिल्कुल उचित थी। अंततः अपर मुख्य सचिव ने सतीश सक्सेना और अन्य की अपील को पूरी तरह से खारिज कर दिया। इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि महानगर पालिका जल्द ही इस 27 हेक्टेयर क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अपनी रुकी हुई कार्रवाई को फिर से शुरू करेगी।
