रमजान में इंसानियत की मिसाल, जालना की अनोखी परंपरा, 50 साल से रोजेदारों को जगा रही शाह बिरादरी

Jalna Ramzan Tradition: रमजान माह शुरू होते ही जालना में शाह बिरादरी के सदस्य पिछले 50 वर्षों से रोज तड़के बस्तियों में जाकर रोजेदारों को सहरी के लिए जगाने की सेवाभावी परंपरा निभा रहे हैं।
A unique tradition in Jalna, the Shah community has been awakening the fasting people for 50 years.
Jalna Ramadan Community Service ( सोर्स: सोशल मीडिया)
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Jalna Ramadan Community Service: जालना पवित्र रमजान माह की शुरुआत होते ही जालना शहर में शाह बिरादरी की वर्षों पुरानी सेवाभावी परंपरा फिर से शुरू हो गई है। पिछले करीब 50 वर्षों से शाह बिरादरी के सदस्य रोजाना तड़के करीब 2 बजे मुस्लिम बस्तियों में जाकर रोजेदारों को सहरी के लिए जगाने का कार्य कर रहे हैं, जिससे सैकड़ों लोगों को समय पर सहरी करने और रोजा रखने में सुविधा होती है।

रमजान महीने में सहरी का विशेष महत्व होता है। रोजेदारों के लिए सुबह जल्दी उठकर इबादत करना, नमाज अदा करना और सहरो करना आवश्यक होता है।

समय पालन और इबादत का संदेश

इस्लाम में समय के पालन को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। रोजा, नमाज और अन्य इबादत निर्धारित समय पर करना जरूरी होता है। ऐसे में शाह बिरादरी का यह प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायी माना जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि इस सेवा के कारण कई परिवारों की सहरी छूटने से बच जाती है और लोग आसानी से समय पर रोजा रख पाते हैं। करीब आधी सदी से लगातार चल रही यह सेवाभावी परंपरा आज भी कायम है, जिसे गर्व की बात माना जाता है। यह परंपरा भाईचारे, एकता और आध्यात्मिक मूल्यों का संदेश दे रही है और समाज सेवा के लिए प्रेरणादायी उदाहरण बन गई है।

15 लोगों का समूह देता है दस्तक

शाह बिरादरी के मुर्शिदी का 12 से 15 सदस्यों का समूह प्रतिदिन तड़के शहर के कई मोहल्लों में पहुंचकर आवाज लगाकर, दरवाजे खटखटाकर सहरी के लिए जगाता है।

रमजान के पूरे महीने यह सेवा जारी रहती है। शाह बिरादरी के सदस्य शहर के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों मालीपुरा, टट्टूपुरा, शिष्टेकडी। दुःखीनगर, पठान मोहल्ला, जफरखान चाल, बुरहान नगर, रहमान गज, कुरैशी मोहल्ला में जाकर रोजेदारों को जगाते हैं।

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