Jalna Crime News: केनरा बैंक में अंदरूनी डकैती, 7.31 करोड़ का सोना गायब, अधिकारी ही निकला चोर

Badnapur Gold Fraud: जालना जिले के बदनापुर स्थित केनरा बैंक में 7.31 करोड़ का गोल्ड घोटाला। बैंक अधिकारियों ने असली सोने की जगह रखा नकली सोना। सीसीटीवी फुटेज से हुआ खुलासा।
Jalna Crime News: Internal Robbery at Canara Bank—Gold Worth ₹7.31 Crore Missing; Bank Official Turns Out to Be the Thief
केनरा बैंक बदनापुर शाखा (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Jalna Canara Bank Scam: महाराष्ट्र के जालना जिले के बदनापुर स्थित केनरा बैंक की शाखा में एक ऐसा घोटाला सामने आया है जिसने बैंकिंग जगत और ग्राहकों के भरोसे को हिला कर रख दिया है। बैंक के ही अधिकारियों ने मिलकर 7 करोड़ 31 लाख रुपये के सोने पर हाथ साफ कर दिया। इस हाई-प्रोफाइल मामले का खुलासा तब हुआ जब सीसीटीवी फुटेज में एक बैंक अधिकारी सरेआम स्ट्रॉन्ग रूम से सोने के पैकेट चोरी करते हुए कैद हो गया।

कैसे खुला नकली सोने का राज?

घोटाले की शुरुआत तब उजागर हुई जब बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने गोल्ड लोन खातों की नियमित ऑडिट (जांच) प्रक्रिया शुरू की। जांच के दौरान जब गोल्ड लोन के पैकेट खोले गए, तो बैंककर्मियों के होश उड़ गए, कुल 22 पैकेट ऐसे मिले जिनमें असली गहनों की जगह 3.79 करोड़ रुपये मूल्य का नकली सोना रखा गया था। इसके अलावा, बैंक के स्ट्रॉन्ग रूम से 30 गोल्ड पैकेट पूरी तरह गायब थे, जिनकी बाजार में कीमत करीब 3.52 करोड़ रुपये आंकी गई है।

रंगे हाथ पकड़े गए अधिकारी

इस मामले में सबसे बड़ा सबूत बैंक के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरों से मिला। 23 अप्रैल 2026 की सुबह करीब 11:20 बजे, फुटेज में बैंक अधिकारी संजय डोंगरे को स्ट्रॉन्ग रूम में प्रवेश करते और वहां से सोने के पैकेट निकालते हुए साफ देखा गया। जांच में यह भी पाया गया कि शाखा प्रबंधक विजेंद्र पाटणकर ने सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया। नियमों के मुताबिक स्ट्रॉन्ग रूम कभी भी अकेले नहीं खोला जाता, लेकिन प्रबंधक ने डोंगरे को वहां अकेला छोड़ दिया, जिससे उन्हें चोरी करने का मौका मिल गया।

पुलिसिया कार्रवाई और बैंक की सुरक्षा पर सवाल

केनरा बैंक के सहायक महाप्रबंधक केशवमूर्ति बी.वी. की शिकायत पर पुलिस ने संजय डोंगरे (बैंक अधिकारी), विजेंद्र पाटणकर (शाखा प्रबंधक) और गोल्ड वैल्यूअर (स्वर्ण मूल्यांकनकर्ता) के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति की चोरी नहीं, बल्कि एक संगठित साजिश हो सकती है, क्योंकि बिना गोल्ड वैल्यूअर की मिलीभगत के असली सोने की जगह नकली सोना रखना संभव नहीं है। इस घटना ने बैंक की इंटरनल सिक्योरिटी और 'डबल ऑथेंटिकेशन' प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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