

जालना जिला एवं सत्र न्यायालय ने बांग्लादेशी नागरिक को दोषी ठहराया।
असलम मनी काजी को दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई।
आरोपी के पास से फर्जी आधार, पैन और मतदाता पहचान-पत्र मिलने का मामला।
बदनापुर पुलिस थाने में वर्ष 2025 में दर्ज हुआ था प्रकरण।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरबी पारवेकर ने 28 अक्टूबर को सुनाया फैसला।
Jalna Court Sentences Bangladeshi National Fake Document: जालना जिला एवं सत्र न्यायालय ने फर्जी पहचान-पत्रों के सहारे महाराष्ट्र में रहने वाले बांग्लादेशी नागरिक असलम मनी काजी को दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी के पास से फर्जी आधार, पैन और मतदाता पहचान-पत्र मिलने का मामला सामने आया था। बदनापुर पुलिस ने वर्ष 2025 में प्रकरण दर्ज किया था।
जालना, अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर फर्जी पहचान-पत्रों के सहारे महाराष्ट्र में निवास करने वाले बांग्लादेशी नागरिक को जालना जिला एवं सत्र न्यायालय ने दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी असलम मनी काजी (26) को अदालत ने दोषी ठहराया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश क्रमांक 6 आरबी पारवेकर ने 28 अक्टूबर को यह फैसला सुनाया। यह मामला वर्ष 2025 में बदनापुर पुलिस थाने में दर्ज किया गया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी और उसके साथ कुछ अन्य लोगों ने कथित तौर पर अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था। इसके बाद फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और मतदाता पहचान-पत्र के सहारे उन्होंने अपनी पहचान तैयार की। आरोपी पहले मुंबई के डोंबिवली पूर्व स्थित मानपाडा क्षेत्र में रहा और बाद में जालना जिले के बदनापुर में निवास करने लगा।
7 अप्रैल 2025 को सुबह बदनापुर पुलिस को डायल 112 के माध्यम से सूचना मिली कि नूर अस्पताल के पास विवाद हो रहा है और एक व्यक्ति की जान को खतरा है। सूचना मिलते ही पुलिस कांस्टेबल रियाज मोहम्मद पठान मौके पर पहुंचे। वहां उन्हें एक महिला और पुरुष आपस में झगड़ते हुए दिखाई दिए।
पूछताछ के दौरान दोनों ने शुरुआत में अपना पता मुंबई शहर बताया। हालांकि, पुलिस की विस्तृत जांच में उनके मूल रूप से बांग्लादेश का निवासी होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू की।
मामले की जांच पुलिस उपनिरीक्षक एजी जायसवाल ने की। जांच पूरी होने के बाद न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान आरोपी ने अपराध स्वीकार करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर उसे विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।