रेल के माध्यम से गुजरात का मसाला असम तक, अहमदाबाद से रवाना हुई पहली रेक

Indian Railways News: भारतीय रेल ने रचा इतिहास! गुजरात के महेसाणा से असम तक पहली बार 4200 क्विंटल जीरा लेकर रवाना हुई स्पेशल रेक। जानें कैसे रेलवे बदल रहा है देश का ट्रेड लॉजिस्टिक्स।
Gujarat's spices to Assam via rail, first rake leaves from Ahmedabad
रेलवे में लदा हुआ जीरा (सोर्स: फाईल फोटो)
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Indian Railways Update: भारतीय रेल ने पश्चिम से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक तेजी से माल परिवहन के लिए रेल लिंक का विस्तार किया है। भारतीय रेल ने वित्त वर्ष 25-26 में 1670 मिलियन टन कार्गो परिवहन कर अब तक का रिकॉर्ड बनाया है। ये सब संभव हो रहा है निरंतर नए क्षेत्रों तक रेल की पहुंच से। पिछले वर्ष जून में जम्मू श्रीनगर रेल लिंक का उद्घाटन किया गया। इससे जम्मू सहित विशेषकर कश्मीर वैली तक विभिन्न उत्पाद जैसे ऑटोमोबाइल, सीमेंट, दूध, इत्यादि का परिवहन संभव हुआ है।

पहली बार स्पाइस लॉजिस्टिक्स

इसी तरह माल ढुलाई के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि दर्ज करते हुए गुजरात के महेसाणा स्टेशन से असम के अजारा तक पहली बार मसालों से लदी स्पेशल “डीम्ड वीपी रेक” रवाना की गई। 6 मई 2026 को रवाना हुई इस विशेष रेक में करीब 4200 क्विंटल जीरा भेजा गया। पहली बार इस रूट पर संगठित स्तर पर मसालों की रेल ढुलाई की गई है, जिसे स्पाइस लॉजिस्टिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे गुजरात के मसाला व्यापारियों एवं इससे जुड़े कृषि क्षेत्र के लोगो को पूर्वोत्तर के बाजारों से सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही व्यापारियों और निर्यातकों को तेज, सुरक्षित और किफायती परिवहन का विकल्प भी उपलब्ध हुआ है।

“कच्छ से कश्मीर” तक खाद्य तेल

हाल ही में भारतीय रेल ने “कच्छ से कश्मीर” तक खाद्य तेल की सफल सप्लाई भी की थी। गांधीधाम क्षेत्र के भीमासर स्टेशन से जम्मू-कश्मीर के बाड़ी ब्राह्मण और अनंतनाग तक खाद्य तेल की खेप भेजी गई। इन प्रयासों से गुजरात एवं पूर्वोत्तर के व्यवसाइयों एवं कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को नए बाजारों तक पहुंच मिली है। जिससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है।

इन फ्रेट मूवमेंट्स ने भारतीय रेल के मजबूत लॉजिस्टिक नेटवर्क और लंबी दूरी तक निर्बाध सप्लाई क्षमता को फिर साबित किया है। रेलवे की बढ़ती माल ढुलाई क्षमता से व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिल रही है, वहीं सड़क परिवहन पर दबाव भी कम हो रहा है।

बढ़ती फ्रेट क्षमता

भारतीय रेल की यह लगातार बढ़ती फ्रेट क्षमता कृषि आधारित सप्लाई चेन को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा रही है। विस्तृत लॉजिस्टिक नेटवर्क, बढ़ी हुई वहन क्षमता एवं समयबद्ध डिलीवरी पर फोकस के चलते अब कृषि उत्पाद देश के अलग-अलग बाजारों तक तेजी से पहुंच रहे हैं। इससे किसानों, व्यापारियों और निर्यातकों को बेहतर कनेक्टिविटी के साथ अधिक भरोसेमंद और किफायती परिवहन विकल्प मिल रहे हैं। पिछले सितंबर 2025 में मिज़ोरम की राजधानी आइजोल को भी रेल लिंक से जोड़ा गया। जिससे खाद्यान्न, ऑटोमोबाइल, सीमेंट इत्यादि का परिवहन पूर्वोत्तर भारत के दुर्गम इलाकों तक संभव हुआ है।

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