

Hingoli Ambulance Fuel Shortage: महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में पिछले एक हफ्ते से पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत देखी जा रही है, लेकिन हिंगोली की इस घटना ने इस संकट के सबसे क्रूर और अमानवीय पहलू को उजागर कर दिया है। औंधा नागनाथ तालुका के जला बाजार इलाके में रहने वाले एक गरीब परिवार के लिए यह ईंधन संकट जिंदगी भर का गम दे गया। जब पीड़ित महिला को तत्काल बड़े अस्पताल में स्थानांतरित करने की जरूरत थी, तब सरकारी तंत्र ईंधन की अनुपलब्धता का रोना रो रहा था।
अस्पताल पहुंचने में हुए घंटों के विलंब के कारण जब महिला को हिंगोली के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, तो वहां के डॉक्टरों ने जो कहा, उसने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया। डॉक्टरों के अनुसार, यदि मरीज को महज आधा या एक घंटा पहले ले आया जाता, तो शिशु को सुरक्षित बचाया जा सकता था। इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन एम्बुलेंस नेटवर्क की पोल खोल कर रख दी है।
पीड़ित महिला के रोते-बिलखते रिश्तेदारों ने मीडिया के सामने स्वास्थ्य केंद्र की संवेदनहीनता की पूरी कहानी बयां की। उन्होंने बताया, "हमारी मरीज की हालत बेहद नाजुक थी और उसे तुरंत हिंगोली ले जाना जरूरी था। जब एम्बुलेंस चालक और डॉक्टरों ने डीजल न होने की बात कही, तो हमने समय गंवाने के बजाय खुद अपनी जेब से ₹850 का डीजल गाड़ी में भरवाया और उसे जैसे-तैसे यहां लेकर आए। लेकिन जब हम हिंगोली अस्पताल पहुंचे, तो डॉक्टर ने कहा कि बहुत देर हो चुकी है, अगर आप थोड़ा पहले आ जाते तो आपकी बच्ची जिंदा होती।"
इस बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले पर अब महाराष्ट्र की राजनीति पूरी तरह गर्मा गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की महिला नेता रोहिणी खडसे ने इस घटना को लेकर शिंदे-फडणवीस सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने इसे प्राकृतिक मौत मानने से इनकार करते हुए सीधे तौर पर 'सरकारी हत्या' करार दिया है। रोहिणी खडसे ने कहा, "एक तरफ ईंधन किल्लत पर सरकार और उसके मंत्री लगातार यह दावा करते हैं कि राज्य में ईंधन की कोई कमी नहीं है, वहीं दूसरी तरफ हिंगोली में सिर्फ इसलिए एक मां को अपना बच्चा खोना पड़ता है क्योंकि एम्बुलेंस को डीजल नहीं मिला।"
हिंगोली जिले सहित पूरे मराठवाड़ा क्षेत्र के नागरिकों में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ईंधन की कमी से अब तक केवल परिवहन और खेती का काम प्रभावित हो रहा था, लेकिन अब यह लोगों की जान पर बन आई है। पीड़ित परिवार की शिकायत के बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि, स्थानीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषी डॉक्टरों और एम्बुलेंस के लिए ईंधन की व्यवस्था न करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वे जिला कलेक्ट्रेट के सामने उग्र प्रदर्शन करेंगे।