Gondia News: रबी फसलों की सिंचाई से गोरेगांव में भूजल स्तर गिरा, जल संकट की आशंका

Goregaon Groundwater Decline: गोरेगांव तहसील में रबी फसलों की सिंचाई से भूजल स्तर तेजी से गिरा, कई गांवों में गर्मी से पहले जल संकट की आशंका बढ़ी।
Maharashtra groundwater level
borewell irrigation issue (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Gondia Water Shortage: गोरेगांव तहसील में इन दिनों रबी फसलों की रोपाई जोर-शोर से शुरू है। बड़े पैमाने पर बोरवेल के माध्यम से फसलों की सिंचाई की जा रही है, जिससे अनेक गांवों का भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। जहां-जहां ये फसलें लगाई जा रही हैं, वहां आसपास के कुएं अभी से सूखने लगे हैं। तहसील के कई गांवों में लगभग यही स्थिति देखी जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में नागरिकों को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है, जो चिंता का विषय है।

उल्लेखनीय है कि गोरेगांव तहसील में हर वर्ष हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलें बोई जाती हैं। खास बात यह है कि तहसील के 99 गांवों में से 94 गांवों में किसान नियमित रूप से ये फसलें ले रहे हैं। गर्मी की शुरुआत होते ही यहां पानी को लेकर त्राहि-त्राहि की स्थिति बन जाती है। अभी से बढ़ती गर्मी के संकेत दिखने लगे हैं और रोपाई के दौरान भारी सिंचाई के कारण कई ग्रामों में जलस्तर गिर गया है।

इन गांवों में जलस्तर नीचे

तहसील के डव्वा, सटवा, सिलेगांव, कवलेवाड़ा, शहारवानी, हीरापुर, पाथरी, बोरगांव, कुरहाड़ी, तिमेझरी, खाड़ीपार, आसलपानी, बोडुंदा, घुमर्रा, कलपाथरी, तिल्ली मोहगांव, पालेवाड़ा, पलखेड़ा, हलबीटोला और श्रीरामपुर पुनर्वसन जैसे गांवों में हर वर्ष गर्मी शुरू होते ही जल संकट की स्थिति बन जाती है।

घरों के बोरवेल और कुएं तक सूख जाते हैं। इसका मुख्य कारण रबी फसलों के लिए होने वाली अत्यधिक जल खपत को माना जा रहा है। मई-जून में तो पीने के पानी के भी लाले पड़ जाते हैं, जिससे नागरिकों को पानी के लिए भटकना पड़ता है।

सभी गांवों के लिए चिंता का विषय

बड़े पूंजीपति किसानों द्वारा व्यापक स्तर पर रबी फसलें ली जा रही हैं, जिससे जल संकट की स्थिति और गंभीर हो रही है। कई गांव इस समस्या से जूझ रहे हैं। रबी फसलों के कारण हर वर्ष जलस्तर में गिरावट आने को लेकर आम नागरिकों और किसानों के बीच बहस तेज हो गई है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि रबी फसलों के लिए जल उपयोग की एक सीमा तय की जाए। हालांकि इस विषय पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे नागरिकों में चिंता बढ़ रही है।

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