महाराष्ट्र: 1 अप्रैल से शुरू होगा 'विकसित भारत रोजगार मिशन', अब मनरेगा मजदूरों को मिलेगा 125 दिन का काम

Gondia News: मनरेगा का स्थान लेगा 'विकसित भारत रोजगार मिशन' 1 अप्रैल से अकुशल मजदूरों को 100 के बजाय 125 दिन का काम मिलेगा। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए फेस ID और ऑनलाइन पंजीयन अनिवार्य।
Viksit Bharat Rojgar Mission replaces MGNREGA from April 1. Laborers to get 125 days of work. Face ID mandatory to stop fraud. Registration open on Yuktidhara portal.
प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो- सोशल मीडिया)
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Viksit Bharat Rojgar News: गोंदिया सरकार ने ग्रापं क्षेत्र में अकुशल मजदूरों के लिए लागू महात्मा गांधी मनरेगा योजना में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए 1 अप्रैल से 'विकसित भारत रोजगार व आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)' को लागू करने का निर्णय लिया है। इस नई योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार निर्मिती, जल संवर्धन, बुनियादी सुविधा और जलवायु परिवर्तन से संबंधित कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।

नई योजना के तहत ग्रामीण मजदूरों को वर्ष में 125 दिन रोजगार उपलब्ध रहेगा और मानसून के दौरान कृषि कार्य सुचारू रूप से चलता रहेगा। इसके लिए लगभग 60 दिनों तक काम बंद रखने की योजना है। अगर मांग के मुताबिक काम मिलने के बावजूद रोजगार नहीं मिलता है, तो बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान है। यह योजना मजदूरों के लिए एक बड़ी आर्थिक सहायता साबित होगी।

मनरेगा की तरह ही इस योजना के तहत गौशाला निर्माण, कुओं की खुदाई, पगडंडी सड़कों पर गिट्टीकरण, सीमेंट-कांक्रीट सड़कें बनाना, तालाबों को गहरा करना और नालियों के सपाटीकरण जैसे कई काम किए जाएंगे। वहीं, ग्रापं स्तर पर कार्यों की योजना का पंजीयन तकनीकी सहायकों के माध्यम से 31 मार्च तक 'युक्तधारा' पोर्टल पर ऑनलाइन कराया जा सकता है। 1 अप्रेल से नई प्रणाली अंतर्गत कामों की शुरुआत होगी।

फेस ID का उपयोग जरूरी

 मनरेगा योजना के तहत पहले 100 योजना में इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। साथ ही, फर्जी मजदूरों पर रोक लगाने के लिए फेस आईडी का उपयोग किया जाएगा। (सुनील कटरे, सहायक कार्यक्रम अधिकारी, पस, गोरेगाव)

भत्ता देकर नए कामों को तुरंत मंजूरी देना आवश्यक

मजदूरी का प्रावधान एक महत्वपूर्ण पहलू योजना का नाम बदलने के बाद से दिसंबर से कई गोंदिया मजदूरों को काम नहीं मिला है। इस अवधि के लिए बेरोजगारी भत्ता देकर नए कामों को तुरंत मंजूरी देना आवश्यक है। (सोमेश्वर रहांगडाले, ग्रापं सदस्य, बबई)

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