नवेगांवबांध अवैध खनन मामले में नया विवाद, नायब तहसीलदार का पत्र बना चर्चा का विषय
Navegaonbandh Illegal Mining: नवेगांवबांध तालाब में कथित अवैध खनन मामले को लेकर अर्जुनी मोरगांव तहसील प्रशासन एक बार फिर विवादों में है। जिस नायब तहसीलदार पर मामले में लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।
Illegal Mining (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Arjuni Morgaon News: नवेगांवबांध तालाब में हुए कथित अवैध खनन मामले को लेकर अर्जुनी मोरगांव तहसील प्रशासन एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिस नायब तहसीलदार पर खनन प्रकरण में लापरवाही के आरोप लग रहे हैं और जिनके निलंबन की मांग की जा रही है, उन्हीं के हस्ताक्षर से जांच संबंधी आदेश जारी होने से प्रशासनिक इलकों में चर्चा तेज हो गई है। इससे जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नवेगांवबांध तालाब परिसर में 21 मई से बड़े पैमाने पर अवैध और अनधिकृत खनन किए जाने की शिकायत सामने आई थी। स्थानीय शिकायतकर्ता राहुल एस। ठवरे ने राजस्व विभाग को इसकी जानकारी दी थी। आरोप है कि 22 मई की रात कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद जेसीबी मशीन और अन्य ट्रैक्टरों को छोड़ दिया गया तथा केवल एक ट्रैक्टर पर मामूली कार्रवाई कर औपचारिकता पूरी की गई।
जांच के घेरे में अधिकारी
शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि तत्कालीन नायब तहसीलदार मंगेश क्षीरसागर ने मामले में गंभीर लापरवाही बरती। इतना ही नहीं, शिकायत के संबंध में पूछताछ करने पर उनके साथ फोन पर अभद्र व्यवहार भी किया गया। वहीं 24 मई को अवकाश का हवाला देकर कार्रवाई टाल दी गई। स्थानीय राजस्व अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका के कारण शासन को लाखों रु। के राजस्व नुकसान तथा पर्यावरण को क्षति पहुंचने की बात भी कही जा रही है।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए अर्जुनी मोरगांव के उपविभागीय अधिकारी ने पत्र जारी कर विस्तृत जांच कर तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेंएसडीओ ने पूरे प्रकरण में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट करने और तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपने को कहा था।
फिर भी उनके हस्ताक्षर से जारी हुआ जांच आदेश
स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिस अधिकारी की भूमिका स्वयं जांच के दायरे में है, उसी के निर्देश पर अधीनस्थ कर्मचारी जांच करेंगे तो निष्पक्ष रिपोर्ट आने की संभावना पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। पत्र की प्रतिलिपि जिलाधीश और एसडीओ को भी भेजी गई है। अब पूरे मामले में लोगों की नजर जिलाधीश के अगले कदम पर टिकी है। नागरिकों ने मांग की है कि जांच किसी स्वतंत्र और वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए तथा प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
प्रभारी तहसीलदार ने जारी किया आदेश
मुख्य तहसीलदार के उपलब्ध नहीं होने के कारण तहसील का प्रभार फिलहाल उसी विवादित नायब तहसीलदार के पास बताया जा रहा है। एसडीओ के आदेश के बाद प्रभारी तहसीलदार के रूप में उन्होंने अपने अधीनस्थ नायब तहसीलदार खुशाल कावले तथा गोठनगांव मंडल अधिकारी को पत्र जारी कर अवैध खनन की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। पत्र पर प्रभारी तहसीलदार के रूप में उनके हस्ताक्षर होने से यह मामला और अधिक विवादित हो गया है।
