नवेगांव-नागझिरा व्याघ्र प्रकल्प का विस्तार: 1,850 वर्ग किमी क्षेत्र, 1 मई से 4 नए गेटों के साथ सफारी शुरू
नवेगांव-नागझिरा व्याघ्र प्रकल्प का क्षेत्रफल बढ़कर 1,850 वर्ग किमी हुआ। कोर और बफर जोन के विलीनीकरण के बाद अब 4 नए प्रवेश द्वारों से मिलेगी एंट्री, स्थानीय लोगों के लिए खुलेंगे रोजगार के द्वार
Navegaon Nagzira Tiger Reserve News: गोंदिया नवेगांवनागझिरा व्याघ्र प्रकल्प में बाघ, तेंदुए, भालू, जंगली श्वान, जंगली सूअर, सांभर, चीतल, नीलगाय, बंदर, जंगली बिल्लियां, चौसिंगा, तडस, लोमड़ी, चमगादड़, उदबिलाऊ सहित अजगर, नाग, घोनस, मन्यार, घोरपड़ और छिपकलियों जैसे 48 तरह के रेंगने वाले जानवर और मोर, चील, शिकारी पक्षी और बारहेडेड गुज जैसे 125 तरह के प्रजातियों का अधिवास है।
महाराष्ट्र के गोंदिया व भंडारा जिले में फैले घने जंगलों के बीच बना नवेगांवनागझिरा वन्यजीव अभ्यारण्य प्रकृति प्रेमियों लगातार अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। गोंदिया जिले के 70 प्रश। व भंडारा जिले के 30 प्रश। क्षेत्र में फैला यह अभ्यारण्य पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
1 अप्रैल 2026 से अभ्यारण्य का कोर व बफर क्षेत्र का विलिनीकरण कर दिया गया है। जिससे नवेगांवनागझिरा व्याघ्र प्रकल्प का क्षेत्रफल 1,850 वर्ग किलोमीटर हो गया है। पहले यहां 650 वर्ग किलोमीटर का कोर जोन था। अब बफर में 1,200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र समाविष्ट कर दिया गया है।
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यह निर्णय शासन ने वर्ष 2017 में ही लिया था। लेकिन इसका क्रियान्वयन 1 अप्रैल से किया गया है। इसमें कुछ क्षेत्र जंगल से घिरा हुआ है, जबकि कुछ क्षेत्रों में राजस्व गांव भी है। व्याघ्र प्रकल्प का क्षेत्र बढ़ने से अब यहां 4 नए प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे।
जिसमें गोंदिया जिले में पांगडी, जांभडी, मुरदोली, भंडारा जिले में गडेगांव डिपो में प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। प्रकल्प के एकत्रिकरण से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
प्राकृतिक इको टूरिज्म के लिए महत्वपूर्ण केंद्रनवेगांवनागझिरा अभयारण्य प्राकृतिक इको टूरिज्म के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां वन संवर्धन के विविध उपक्रम क्रियान्वित किए जाते हैं। यहां शिकारियों से वन्यजीवों की सुरक्षा करने के लिए जगहजगह अत्याधुनिक ट्रैक कैमरे लगाए गए हैं।
वन्यप्राणियों के लिए जलस्त्रोत बनाए गए हैं। ढलान वाली पहाड़ियां, गहरे नाले में बहने वाली पानी की कलकल के बीच अभ्यारण्य के मध्य भाग में नाग मंदिर है। झिरा इस मराठी शब्द का अर्थ शाश्वत जलस्त्रोत होने के कारण इस स्थान का नाम नागझिरा पड़ने की बात कही जाती है।
यहां के जंगल में सर्वाधिक पेड़ सागवान के दिखाई पड़ते हैं। इसके साथ ही बांबू के पेड़ों की भी विपुलता है। 0पर्यटन विकास का नया अध्याय होगा शुरू एनएनटीआर का क्षेत्र बढ़ने से पर्यटन विकास का नया अध्याय शुरू होगा।
बफर क्षेत्र में बारह महीने पर्यटक सफारी कर सकेंगे। नाइट सफारी भी की जा सकती है। प्रकल्प में 20 से 22 की संख्या में बाध उपलब्ध हैं, जो कोर क्षेत्र के अलावा बफर क्षेत्र में भी पर्यटकों को दिखते हैं।
पर्यटन बढ़ने से ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। वर्तमान में प्रवेश के लिए कुल 9 गेट हैं। हम 4 गेट और बढ़ाने जा रहे हैं। 1 मई से इन्हें शुरू करने का नियोजन है।
