Gondia Crime: आमगांव तहसील के किंड़गीपार गांव में शराब की दुकानें हमेशा के लिए बंद करने की मांग को लेकर ग्रामवासियों में रोष हैं. ग्रामवासियों ने चेतावनी दी है कि अगर अगले चार दिनों में गांव में शराब पर रोक नहीं लगी, तो वे ट्रेन रोको आंदोलन करेंगे.
इस बारे में तहसीलदार के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया है. इस बीच, ग्रामीण प्रतिबंधात्मक धारा लागू होने की वजह से आंदोलन न करने का नोटिस देने गए पुलिसवालों और ग्रामवासी के बीच धक्कामुक्की हो गई. धक्कामुक्की करने वालें तीन लोगों को 6 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया.
नोटिस का विरोध करने वाले की गिरफ्तारी से ग्रामवासी भड़क गए. जैसे ही उन्हें गिरफ्तार किया गया, ग्रामवासियों ने पुलिस पर पत्थर फेंके. पुलिस प्रशासन का कहना है कि इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया. जिसमें पुलिसकर्मी जयश्री ईश्वर गाडबांधे, सुरेखा अवताड़े, शाम ब्राह्मणकर, मनीषा निकम, प्रवीण डांगे और पुलिस निरीक्षक, एपीआई व अन्य पुलिस कर्मियों के अलावा कुछ ग्रामवासी घायल हो गए.
ग्रामवासी देर रात तक पुलिस थाने में थे. किंडगीपार गांव की आबादी करीब 2,500 है, जिसमें ज्यादातर लोग मजदूर, हमाल व खेतिहर मजदूर हैं. महिलाओं ने अपना इरादा जताया कि गांव की तरक्की और अच्छे सामाजिक माहौल के लिए गांव में शराब की दुकान नहीं होनी चाहिए.
गांव में शराब की दुकान को जल्द से जल्द बंद करने के लिए चुनाव कराए जाने चाहिए और चुनाव तक शराब की दुकान बंद रखी जाए. अगर प्रशासन टालमटोल करता रहा तो 10 अप्रैल को रास्ता रोको आंदोलन किया जाएगा.
रोषित ग्रामवासियों ने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे तुरंत रेलवे ट्रैक पर सो जाएंगे और संतोष डोंडे, चुनेश्वरी हरिनखेड़े, प्रमिला खरोले, यमन पुसम व रूपकला भांडारकर के साथ आत्महत्या कर लेंगे.
हालांकि, जब प्रशासन ने उनसे प्रतिबंधात्मक धारा लागू होने से आंदोलन न करने की विनंती, से आंदोलन तेज हो गया. जिसके बाद लाठीचार्ज किया गया. जिसमें पुलिसकर्मी सहित ग्रामीण भी घायल हो गए. किंडगीपार गांव और आमगांव थाने में देर रात तक तनाव की स्थिति कायम थी.